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Delhi NCR News: किडनी के मरीजों में कई गुना बढ़ जाता है टीबी का खतरा
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-आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने शोध के आधार पर दी जानकारी
-कहा, दोनों अस्पतालों में इलाज के लिए आए 13,342 किडनी मरीजों की जांच की गई
-शोध में यह भी सामने आया कि हर चार में से एक किडनी मरीज के शरीर में टीबी के कीटाणु छिपे हुए थे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। किडनी की पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीजों को टीबी (तपेदिक) होने का खतरा आम लोगों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। यह खुलासा आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की तरफ से की गई एक हालिया शोध में हुआ है।।आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर हिमांशु शेखर महापात्रा के अनुसार, किडनी की बीमारी से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसी वजह से टीबी जैसे संक्रमण आसानी से शरीर में पनप जाते हैं।
शोध में दोनों अस्पतालों में इलाज के लिए आए 13,342 किडनी मरीजों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि हर 100 में से करीब 6 मरीज टीबी से पीड़ित थे, जो सामान्य आबादी की तुलना में काफी अधिक है। शोध में यह भी सामने आया कि हर चार में से एक किडनी मरीज के शरीर में टीबी के कीटाणु छिपे हुए थे। ऐसे मामलों में अभी बीमारी के लक्षण नहीं दिखते, लेकिन भविष्य में टीबी होने का खतरा बना रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किडनी की बीमारी के साथ कम वजन, हाई ब्लड प्रेशर और सही खानपान की कमी हो, तो टीबी का खतरा और बढ़ जाता है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. ललित पुरसनानी बताते हैं कि समय पर जांच से टीबी की पहचान हो जाए, तो इलाज काफी आसान हो जाता है।
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-कहा, दोनों अस्पतालों में इलाज के लिए आए 13,342 किडनी मरीजों की जांच की गई
-शोध में यह भी सामने आया कि हर चार में से एक किडनी मरीज के शरीर में टीबी के कीटाणु छिपे हुए थे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। किडनी की पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीजों को टीबी (तपेदिक) होने का खतरा आम लोगों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। यह खुलासा आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की तरफ से की गई एक हालिया शोध में हुआ है।।आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर हिमांशु शेखर महापात्रा के अनुसार, किडनी की बीमारी से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसी वजह से टीबी जैसे संक्रमण आसानी से शरीर में पनप जाते हैं।
शोध में दोनों अस्पतालों में इलाज के लिए आए 13,342 किडनी मरीजों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि हर 100 में से करीब 6 मरीज टीबी से पीड़ित थे, जो सामान्य आबादी की तुलना में काफी अधिक है। शोध में यह भी सामने आया कि हर चार में से एक किडनी मरीज के शरीर में टीबी के कीटाणु छिपे हुए थे। ऐसे मामलों में अभी बीमारी के लक्षण नहीं दिखते, लेकिन भविष्य में टीबी होने का खतरा बना रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किडनी की बीमारी के साथ कम वजन, हाई ब्लड प्रेशर और सही खानपान की कमी हो, तो टीबी का खतरा और बढ़ जाता है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. ललित पुरसनानी बताते हैं कि समय पर जांच से टीबी की पहचान हो जाए, तो इलाज काफी आसान हो जाता है।
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