फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Khap ends 500 years old ritual.

खाप ने क्यों बदली 500 साल पुरानी परंपरा?

Wed, 27 Aug 2014 12:43 PM IST
Updated Wed, 27 Aug 2014 12:43 PM IST
विज्ञापन
Khap ends 500 years old ritual.

अक्सर ऑनर किलिंग के लिए चर्चा में रहने वाली खाप पंचायत ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपनी 500 साल पुरानी परंपरा को बदल दिया है।

विज्ञापन


इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सेक्स रेसियो यानि लिंगानुपात में लगातार गिरावट ने खाप को इस विषय पर सोचने को मजबूर कर दिया।

मेवात के जौरासी फतेहपुर गांव में धारीवाल गोत्र के लोग अधिकता में हैं। यहां की जाट खाप पंचायत ने 'पगड़ीबंदी' नामक 500 साल पुरानी परंपरा को बदलने का फैसला लिया है।
विज्ञापन


इस परंपरा के मुताबिक आस-पास रहने वाले पांच गांव के लड़के-लड़कियां आपस में शादी नहीं कर सकते थे। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।

नजदीक के गांवों में हो सकेगी शादी

Khap ends 500 years old ritual.

जौरासी गांव के सरपंच देवेंद्र धारीवाल ने बताया कि हमने महापंचायत का आयोजन किया जिसमें 12 गांवों का नेतृत्व करने वाले जौरासी फतेहपुर और 18 गांवों के चौधरी गुड़गांव गांव के बीच यह फैसला लिया गया कि अब इन जाट गांवों के बीच विवाह संबंध बनाने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

हालांकि सूत्रों का मानना है कि इस फैसले के पीछे तेजी से गिरता सेक्स रेसियो एक बड़ा कारण हो सकता है। गौरतलब है कि इस इलाके में वर्तमान लिंगानुपात 1000 पुरूषों पर 879 महिलाओं का है। इसके पीछे कन्या भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

80 वर्षीय पंचायत सदस्य वेद राम धारीवाल ने कहा कि पहली बार खाप ने ऐसा प्रगतिवादी फैसला लिया है। जाट समुदाय के लोग शादी-विवाह के मामलों में बहुत कठोर होते हैं लेकिन समय के साथ इसमें भी बदलाव आ रहा है।

युवाओं को अभी भी है एक बड़ी चिंता

Khap ends 500 years old ritual.

हालांकि यहां के युवा अभी भी अपने बुजुर्गों से सहमत नहीं हैं। जौरासी के हाई स्कूल में पढ़ने वाली एक युवा लड़की ने कहा कि इस फैसले के बावजूद उन्हें कभी भी अपना मनपसंद जीवन साथी चुनने की आजादी नहीं दी जाएगी।

इतना ही नहीं एक छात्रा ने तो यह भी कहा कि लड़कियों से उनकी मर्जी पूछने की बात तो बहुत दूर है, हमें तो आज तक जौरासी गांव से बाहर जाने तक की इजाजत नहीं दी गई।


वेद राम का कहना है कि भले ही गांवों के बीच शादियों की अनुमति दे दी गई है लेकिन अभी भी एक ही गोत्र में शादी करने की इजाजत किसी को नहीं है।

वेद राम ने आगे कहा कि हम अभी भी समान गोत्र में शादी के खिलाफ हैं। पांच गावों के बीच शादी करने का फैसला उन युवाओं के लिए बेहतर साबित होगा जिन्हें सही लाइफ पार्टनर की तलाश में भटकना पड़ता है।

विज्ञापन

इस फैसले से लड़कियों को मिलेगा फायदा

Khap ends 500 years old ritual.

अभी तक जौरासी गांव के लोग अपनी बेटियों की शादी हरियाणा के पलवल और झज्‍जर गांव में करते थे। कुछ शादियां तो राजस्‍थान के कोट बासिम तक में हुई हैं।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि इस फैसले का असली फायदा लड़कियों को मिलेगा। पंचायत के एक वरिष्ठ सदस्य प्रहलाद धारीवाल की दो पोतियां हैं जिन्होंने हाल ही में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है।

उनका कहना है कि पहले हरियाणा में पढ़े-लिखे और अच्छे लड़के मिलना मुश्किल होता था लेकिन अब आस-पास के गांवों में अच्छे लड़कों की तलाश की जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed