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'खेतान ने किया था सभी धर्म ग्रंथों का अपमान, केजरीवाल की पश्चाताप सेवा महज नाटक'
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 18 Jul 2016 07:22 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली प्रदेश भाजपा ने अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर में सोमवार को स्वरचित पश्चाताप सेवा करने प्र मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा किया है।
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पार्टी नेताओं ने उनकी पश्चाताप सेवा को नाटक करार दिया। उनका कहना है कि अमृतसर में पंजाब के वोटरों को भ्रमित करने के लिए किया गया नाटक बिलकुल उसी तर्ज पर था जैसे 2015 के दिल्ली विस चुनाव से पहले वोटरों कोग भ्रमित करने के लिए किया गया था।
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प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय एवं भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री आरपी सिंह ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को अपने पार्टी सहयोगी आशीष खेतान के विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों से पार्टी के युवा मेनिफेस्टो की तुलना करने पर कोई अफसोस नहीं है।
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अगर उनको आशीष खेतान के कृत्य पर अफसोस होता तो वह उनको पार्टी से निष्कासित करते। मगर मुख्यमंत्री ने खेतान को निष्कासित करने के बजाय पंजाब चुनाव से पहले सिखों को शांत करने के लिए राजनीतिक रास्ता चुना और श्री हरमंदिर साहिब में माफी मांगने पहुंच गए।
क्या मुख्यमंत्री अब अन्य धर्मों से भी माफी मांगेगे?
सतीश उपाध्याय
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या खेतान ने केवल गुरू ग्रंथ साहिब का अपमान किया था? उन्होंने अन्य धर्म ग्रंथों का भी तो अपमान किया था। क्या मुख्यमंत्री अब अन्य धर्मों से भी माफी मांगेगे?
उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए अरविंद केजरीवाल ने गुरू घर में जाकर पहले से साफ बर्तनों एवं फर्श की सफाई का नाटक किया। ऐसा करके मुख्यमंत्री ने करोड़ों सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, क्योंकि गुरू घर की सेवा को सबसे पवित्र कार्य मानते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद को गुरू ग्रंथ साहिब को अपमानित करने का दोषी मानते थे तो उन्हें अपनी सजा खुद तय करने का कोई अधिकार नहीं था। उन्हें श्री अकालतख्त साहिब में पेश होना चाहिए था। सिखों की धार्मिक मान्यतानुसार गुरू ग्रंथ साहिब या गुरू साहिबों के अनादर की सजा देना श्री अकालतख्त साहिब का अधिकार क्षेत्र है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए अरविंद केजरीवाल ने गुरू घर में जाकर पहले से साफ बर्तनों एवं फर्श की सफाई का नाटक किया। ऐसा करके मुख्यमंत्री ने करोड़ों सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, क्योंकि गुरू घर की सेवा को सबसे पवित्र कार्य मानते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद को गुरू ग्रंथ साहिब को अपमानित करने का दोषी मानते थे तो उन्हें अपनी सजा खुद तय करने का कोई अधिकार नहीं था। उन्हें श्री अकालतख्त साहिब में पेश होना चाहिए था। सिखों की धार्मिक मान्यतानुसार गुरू ग्रंथ साहिब या गुरू साहिबों के अनादर की सजा देना श्री अकालतख्त साहिब का अधिकार क्षेत्र है।