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सीएम केजरीवाल ने एलजी को लिखी चिट्ठी, पूछा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधा कैसे मान सकते हैं आप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:01 PM IST
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केजरीवाल ने लिखी एलजी को चिट्ठी
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दिल्ली में अधिकारों की जंग को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी मुख्यमंत्री और एलजी के बीच की जंग खत्म नहीं हुई है। एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपने हक में मानकर केजरीवाल सरकार ने ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। वहीं एलजी अब भी गृहमंत्रालय के 2015 के नोटिफिकेशन को ढाल बनाकर ट्रांसफर और पोस्टिंग पर सरकार की बात मानने से इनकार कर रहे हैं।
इसी सिलसिले में आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिख ये पूछा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधा-आधा कैसे मान सकते हैं। इस खत में केजरीवाल ने लिखा है कि एलजी साहब आप कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ नंबर 277 के प्वाइंट नंबर 11 से तो सहमत हैं जिसमें कहा गया है कि एलजी की सहमति किसी बात के लिए जरूरी नहीं है।
केजरीवाल ने आगे कहा, लेकिन आप उसी पैराग्राफ 277 के प्वाइंट नंबर 14, 15 और 16 को मानने से इनकार कर रहे हैं। आप इस तरह कैसे किसी फैसले को मानने में सेलेक्टिव हो सकते हैं। आप कैसे एक फैसले को आधा मान सकते हैं और आधा नहीं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जमीन, कानून व्यवस्था और सेवा को छोड़कर सभी विषयों पर दिल्ली सरकार फैसला ले सकती है। एलजी की सहमति हर बात के लिए जरूरी नहीं है।
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इसी सिलसिले में आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिख ये पूछा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधा-आधा कैसे मान सकते हैं। इस खत में केजरीवाल ने लिखा है कि एलजी साहब आप कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ नंबर 277 के प्वाइंट नंबर 11 से तो सहमत हैं जिसमें कहा गया है कि एलजी की सहमति किसी बात के लिए जरूरी नहीं है।
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केजरीवाल ने आगे कहा, लेकिन आप उसी पैराग्राफ 277 के प्वाइंट नंबर 14, 15 और 16 को मानने से इनकार कर रहे हैं। आप इस तरह कैसे किसी फैसले को मानने में सेलेक्टिव हो सकते हैं। आप कैसे एक फैसले को आधा मान सकते हैं और आधा नहीं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जमीन, कानून व्यवस्था और सेवा को छोड़कर सभी विषयों पर दिल्ली सरकार फैसला ले सकती है। एलजी की सहमति हर बात के लिए जरूरी नहीं है।
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Delhi CM writes letter to LG Anil Baijal writes 'You agreed with Para 277 (xxi) of SC's judgement which says concurrence of LG is no required. However you refuse to implement Para 277 (xiv), (xv) & (xvi) of the same judgement. How can you be selective in accepting the judgement?' pic.twitter.com/exsIdMbXEW
— ANI (@ANI) July 9, 2018