जिस बात पर छोड़ी थी कुर्सी अब उसी बात पर अड़े केजरीवाल
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दिल्ली सरकार जनलोकपाल कानून के मामले में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। जिस जनलोकपाल बिल को विधानसभा में बिना केन्द्र की मंजूरी के पेश करने में असफलता मिलने पर अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था, उसे इस बार पेश करने से पूर्व केन्द्र सरकार को भेजेगी।
ताकि विधानसभा में पास करके भेजे जाने पर तुरंत कानून बन सके। दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि जून के दूसरे पखवाड़े में होने वाले बजट सत्र में जनलोकपाल बिल सरकार पेश करेगी।
जब तक जनलोकपाल बिल नहीं बन जाता तब तक दिल्ली में सरकार लोकायुक्त नियुक्ति नहीं करना चाहती क्योंकि पुराने लोकायुक्त अधिनियम में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगता। यही वजह है कि नए कानून के आने पर दिल्ली लोकायुक्त-उपलोकायुक्त अधिनियम, 1995 और दिल्ली समयबद्ध सेवा अधिनियम, 2011 स्वयं खत्म हो जाएंगे। पुराने केस जनलोकपाल के पास ट्रांसफर हो जाएंगे।
ये होंगे दिल्ली के लोकपाल के अधिकार
नए कानून में जांच अधिकारी की नियुक्ति से लेकर भ्रष्टाचार जांच के लिए भवन के सर्च वारंट जारी करने, किसी ठेके को रद्द करने, व्हीशलब्लोअर की सुरक्षा, ईमानदारी अधिकारी को ईनाम देने का कानून बनाने का भी अधिकार होगा।
कानून के लागू होने पर सरकारी कर्मी को प्रत्येक 31 जनवरी को प्रॉपर्टी की सूचना देनी होगी। इसके अलावा सरकारी नौकर के खिलाफ झूठी सूचना देने वालों पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी जनलोकपाल केपास होगा।
दिल्ली सरकार जनलोकपाल बिल, 2015 पर कानून बनने केबाद ही दिल्ली में लोकायुक्त की नियुक्ति करेगी। हालांकि नए कानून में जनलोकपाल में एक चेयरमैन और 6-10 तक सदस्य होंगे।
चेयरमैन की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी करेगी जिसमें नेता प्रतिपक्ष, उच्च न्यायालय के दो जज, पिछले चेयरमैन में से होंगे। सदस्यों में पचास फीसदी आरक्षित श्रेणी व महिला दावेदारों में होंगे।
क्या है दिल्ली जनलोकपाल की पुरानी कहानी
दिल्ली जनलोकपाल बिल, 2014 को विधानसभा में पेश करने की लड़ाई में 14 फरवरी, 2014 को विधानसभा में अरविंद केजरीवाल को हार मिली थी।
वो उपराज्यपाल या केन्द्र सरकार को प्रस्ताव दिखाए बिना विस में पेश करना चाहते थे जबकि उपराज्यपाल ने अपना वीटो लगाकर इसे रोकने का संदेश विस को भिजवाया था।
यहां प्रस्ताव पेश करने को लेकर पक्ष में सिर्फ 27 वोट पड़े थे जबकि खिलाफ 42 वोट पड़े थे। इससे क्षुब्ध अरविंद केजरीवाल ने उसी दिन शाम को इस्तीफा दे दिया था।