दिल्ली की जंग में केजरीवाल ने बताई नजीब की 'हद'
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दिल्ली सरकार में प्रधान गृह सचिव पर केंद्र और उपराज्यपाल से अरविंद केजरीवाल सरकार की तकरार थमती नहीं दिख रही है। प्रधान गृह सचिव को हटाकर राजेंद्र कुमार से गृह सचिव का काम करने के लिए गृहमंत्री सत्येंद्र जैन ने संबंधित अधिकारियों को चिट्ठी लिखी तो अरविंद केजरीवाल ने सीधे उपराज्यपाल को पत्र लिखकर उनका दायरा बताया।
इसकी कॉपी केंद्र सरकार को भी भेजी। इसमें कहा कि दिल्ली सरकार को काम बांटने का अधिकार है। आदेश रद्द करने का अधिकार उपराज्यपाल केपास नहीं, सिर्फ कोर्ट रद्द कर सकता है।
इससे पहले उपराज्यपाल सरकार के आदेश को अनदेखा करने का आदेश सेवा विभाग व गृह विभाग को भेज चुके थे। हालांकि बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव ने धर्मपाल के काम में बाधा न डालने की हिदायत संबंधित अधिकारियों को दी है। विवाद थमता नहीं दिख रहा है।
दूसरी तरफ बुधवार शाम को ही केंद्र सरकार की तरफ से मुख्य सचिव केके शर्मा को एक चिट्ठी मिली। इसमें धर्मपाल को हटाने वाले आदेश संख्या 296, 297 को रद्द करने का आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए थे। गृह मंत्रालय के आदेश में साफ लिखा था कि गृह सचिव और भूमि एवं भवन सचिव की नियुक्ति ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स के नियम 55(2)(बी) के तहत होती है।
एक-दूसरे को बता रहे अधिकारों की सीमा
इन दोनों पद की नियुक्ति की स्वीकृति गृहमंत्रालय से लेनी जरूरी है। फिर केंद्र सरकार के ज्वाइंट कैडर अथॉरिटी(जेसीए) के पास नियुक्ति का अधिकार है। ऐसे में राज्य सरकार किसी एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी को एमएचए नहीं भेज सकती। इसलिए आदेश संख्या 296, 297 को तुरंत रद्द करके उसकी सूचना गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल को भेजें।
गृह मंत्रालय से मिली चिट्ठी के बाद मुख्य सचिव केके शर्मा ने एक आदेश जारी करके उसमें लिखा है कि उपराज्यपाल की तरफ से 9 जून को आए एक पत्र में साफ कहा गया है कि गृहसचिव और भूमि एवं भवन सचिव बदलने की स्वीकृति नहीं ली गई।
फिर गृहमंत्रालय ने भी आदेश रद्द करने को कहा है। उसी आदेश का हवाला देकर कहा है कि धर्मपाल को बतौर प्रधान गृह सचिव और भूमि एवं भवन सचिव बिना किसी बाधा के काम करने दिया जाए। फिर तत्काल प्रभाव ने दोनो आदेश रद्द करके सूचित करें। यह पत्र सेवा सचिव को भेजा गया है।
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में ज्वाइंट कमिशनर की नियुक्ति से शुरू हुए विवाद में आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रधान गृह सचिव धर्मपाल को वापस गृह मंत्रालय भेजने का आदेश किया तो उपराज्यपाल ने रोक दिया। फिर बुधवार को धर्मपाल के साथ-साथ बतौर गृहसचिव राजेंद्र कुमार ने भी काम देखा।