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'केजरीवाल की मोदी को सलाह देने की हैसियत नहीं'

Wed, 22 Jul 2015 12:26 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Jul 2015 12:26 PM IST
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'Kejriwal's not worth advising Modi'

दिल्ली सरकार के विज्ञापन पर भाजपा भड़क गई है। भाजपा का कहना है कि संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर केजरीवाल सरकार ने प्रधानमंत्री से अपील वाला विज्ञापन जारी किया है।

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प्रदेश भाजपा प्रभारी व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने तो यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देने की औकात नहीं है।

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विज्ञापन पर भड़की भाजपा ने तो बकायदा एक प्रेस कॉंफ्रेंस कर कहा कि केजरीवाल सरकार ओछी राजनीति करना बंद करे। श्याम जाजू ने यह भी कहा कि केजरीवाल प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने व राष्ट्रीय राजनीति में अग्रसर होने की महत्वकांक्षा की पूर्ति को लेकर वह केंद्र सरकार से बार-बार टकराव कर रहे हैं।
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'केंद्र ने हमेशा सहयोग का हाथ बढ़ाया है'

'Kejriwal's not worth advising Modi'

संविधान में राज्य और केंद्र के बीच समन्वय के अनेक रास्ते हैं, अनेक बार राजनीतिक मतभेदों के चलते टकराव भी हुए हैं पर दोनों पक्षों ने मर्यादा से काम लिया। केंद्र सरकार ने हर मुद्दे पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल को दो बार प्रधानमंत्री से तो करीब छह बार गृह मंत्री से मिलने का समय मिला है। यह अन्य राज्य के मुख्यमंत्री की औसत मुलाकात से अधिक है।

केजरीवाल संवेदनशील मामलों में भी वह मुद्दा ही उठाते हैं जिस पर मीडिया का ध्यान केंद्रित हो। मीनाक्षी की हत्या मामले में तो प्रधानमंत्री पर आक्षेप लगाने का प्रयास किया है।

'दिल्ली में भ्रष्टाचार चरम पर है'

'Kejriwal's not worth advising Modi'

वहीं दूसरी ओर सीरियल रेपिस्ट किलर का मामले पर मीडिया कवरेज नहीं मिला तो इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। मीनाक्षी के परिवार को मुआवजा दिया पर सीरियल किलर द्वारा मारे गये बच्चों के परिवारों की ओर ध्यान तक नहीं दिया।

यह उनकी राजनीति से प्रेरित असंवेदनशीलता नहीं तो क्या है? प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा है कि भाजपा इस अराजक राजनीति का कड़ा विरोध करती है।

प्रधानमंत्री से अपील वाले विज्ञापन से साफ हो गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में उनका कोई विश्वास नहीं है। दिल्ली में भ्रष्टाचार चरम पर है जिसका प्रमाण है दिल्ली सरकार के एक उपायुक्त का अपने कार्यालय में दस लाख रुपये रिश्वत लेते हुये पकड़े जाना।

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