{"_id":"5b4448294f1c1bb2288b595c","slug":"kejriwal-reach-supreme-court-for-service-transfer-and-postings-under-government-hearing-next-week","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब ट्रांसफर और पोस्टिंग मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल, अगले हफ्ते होगी सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब ट्रांसफर और पोस्टिंग मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल, अगले हफ्ते होगी सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:30 AM IST
विज्ञापन
केजरीवाल सिसोदिया
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारों की जंग को लेकर दिल्ली सरकार और एलजी के बीच छिड़ी जंग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस बार दिल्ली सरकार ने ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते होगी।
विज्ञापन
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर जो बड़ा फैसला आया है उसके बाद भी दिल्ली में खींचतान खत्म नहीं हुई है। उपराज्यपाल ने गृहमंत्रालय के 2015 के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए ट्रांसफर पोस्टिंग अपने अधिकार में रखने की बात कही है। वहीं इस मामले में केजरीवाल ने एलजी को खत लिखकर सुप्रीम कोर्ट जाने की भी बात कह दी है।
विज्ञापन
केजरीवाल की एलजी को चिट्ठी- ‘आदेश पूरा लागू करें, शंका हो तो सुप्रीम कोर्ट जाओ’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केजरीवाल ने फिर उपराज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि उपराज्यपाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरी तरह लागू करें। कोई शंका है तो वह सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
विज्ञापन
कोर्ट के फैसले के बाद भी सेवाओं के मसले पर चल रही रार के बीच केजरीवाल ने लिखा है कि गृह मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का हक नहीं है। उपराज्यपाल सफाई लेने सुप्रीम कोर्ट जाएं, लेकिन उसके आदेश का उल्लंघन नहीं करें।
उन्होंने लिखा कि एलजी कोर्ट के आदेश का एक हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि सरकार को अनुमति की जरूरत नहीं है, पर उसी आदेश का दूसरा हिस्सा नहीं मान रहे, जिसमें लिखा है कि केंद्र के अधिकार तीन विषयों तक हैं।
केजरीवाल ने पत्र में पांच मसले उठाए हैं। इनमें सलाह, मंत्री परिषद का फैसला, कौन है दिल्ली सरकार, एलजी के पास फाइल जाने जैसे चार मसलों पर एलजी व केंद्र सरकार राजी हैं, लेकिन आरक्षित विषय पर सहमत नहीं हैं। केजरीवाल के मुताबिक, असल में एलजी और गृह मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली सर्विसेज विभाग अब भी आरक्षित विषय है, जबकि कोर्ट ने भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था को ही आरक्षित बताया है।