इस खास प्लान से मिलेगी दिल्ली को बिजली
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दिल्ली के लोगों के लिए सस्ती बिजली मुहैया कराने की जंग लड़ रहे केजरीवाल ने एक नया तरीका खोज निकाला है। पारम्परिक ऊर्जा के जरिए अब दिल्ली के लोगों को बिजली देने के लिए केजरीवाल नई पहल कर रहे हैं।
आपको बता दें कि बिजली ही केजरीवाल का एक ऐसा वादा है जिसपर दिल्ली की जनता ने सबसे ज्यादा भरोसा किया है, क्योंकि बिजली बिल की वजह से परेशान जनता सस्ती बिजली की आस लगाए बैठी है। जहां आम आदमी पार्टी की सरकार केन्द्र से कोल आबंटन की मांग कर चुकी है तो वहीं दूसरी ओर अब सोलर एनर्जी के जरिए भी वो दिल्ली को बिजली मुहैया कराने पर प्लान बना चुके हैं।
आम आदमी पार्टी की भरोसा है कि वो कम कीमतों में बिजली कंपनियों के ऑडिट के जरिए सस्ती बिजली मुहैया करा सकते हैं और अगर कहीं कमी पड़ती है तो उसे पारम्परिक ऊर्जा के द्वारा पूरा कर सकते हैं।
केजरीवाल ने समस्या से निपटने का निकाला नया फंडा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केजरीवाल पर हमला कर चुके हैं कि वो लोग सस्ती बिजली देने का दावा करते हैं जिनके खुद के पास बिजली ही मौजूद नहीं है। आपको बता दें कि दिल्ली की खपत की 80 प्रतिशत बिजली सरकार को अन्य राज्यों से खरीदनी पड़ती है।
एक तरफ जब अक्षय ऊर्जा कांफ्रेंस में मोदी ने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि वो सस्ती बिजली कैसे देंगे तो वहीं दूसरी ओर आप ने अब एक नए प्लान के तहत उन्हीं के अंदाज में सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करने की ठान ली है।
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सोलर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए पांच सूत्रीय एजेंडा तैयार किया है। इस एजेंडे में सौर ऊर्जा को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार काम करने वाली है।
इसके लिए सौर ऊर्जा से सम्बंधित उपकरणों पर टैक्स कम करने की बात भी की गई है। वहीं दूसरी ओर अगर कोई अपने घर में सोलर यूनिट लगाता है तो उसे सब्सिडी देने की भी सरकार की योजना है।
इसके अलावा दिल्ली में झुग्गियों और कम आय वाले घरों को सौर ऊर्जा की प्राथमिकता में रखा जाना है। सरकार ने तय किया है कि वो बिजली की खपत का 20 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पैदा करें।
क्या है केजरीवाल सरकार का सौर ऊर्जा प्लान
घर में सोलर यूनिट लगाने पर दिल्ली सरकार देगी सब्सिडी।
बैट्री और सोलर उपकरणों पर टैक्स कम कर बढ़ावा।
झुग्गियों और कम आय वाले घरों को सौर ऊर्जा देने की प्राथमिकता।
कुल खपत का 20 प्रतिशत सौर ऊर्जा से उत्पादन।
लोगों को बढ़ावा देना कि वो सौर ऊर्जा का इतना उत्पादन करें जिसे बेंचा जा सके।
भले ही सोलर एनर्जी से हमें इतनी ऊर्जा ना मिल सके जिससे ग्रिड आधारित बिजली से निर्भरता घट जाए, लेकिन दिल्ली के लिए ये फायदेमंद साबित हो सकती है।
दिल्ली में सौर ऊर्जा के लिए क्या थी मुश्किल
दिल्ली में सोलर ऊर्जा के लिए ये कहा जाता रहा है कि इसके प्लांट यहां लगाने के लिए जमीन मौजूद नहीं है। वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि केजरीवाल सरकार अगर वास्तविकता में कदम उठाना चाहती है तो उसे दिल्ली में जमीन की कमी नहीं होगी।
सरकार के पास ऐसी कई बिल्डिंग्स मौजूद हैं जहां सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए जा सकते हैं। दिल्ली में अगर सोलर एनर्जी पैदा होती है तो ट्रांसमिशन घाटा भी नहीं होगा।
डीईआरसी नेट मीटिरंग योजना को लेकर पहले ही काम कर चुकी है। जिससे ऐसा होगा कि अगर सौर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन खपत से ज्यादा होता है तो वो वापस ग्रिड में चली जाएगी। हां ये प्लांट्स मंहगे होने की वजह से केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा चैलेंज जरूर है।