फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   kejriwal lie exposed, the truth about the High Court ruling on ACB

केजरीवाल का एक और झूठ जिसने हाईकोर्ट को भी नहीं बख्शा

Wed, 27 May 2015 02:20 PM IST
Updated Wed, 27 May 2015 02:20 PM IST
विज्ञापन
kejriwal lie exposed, the truth about the High Court ruling on ACB

कानूनी रूप से देखा जाए तो कोर्ट किसी भी ऐसे मामले में फैसला सुना नहीं सकती जिसका किसी भी संबंधित पक्ष ने दावा न किया हो। और इस केस में वादी या प्रतिवादी किसी ने भी गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन पर कोई राहत की मांग नहीं की थी।

विज्ञापन


यानी यह बात साफ है कि अदालत ने गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन पर केजरीवाल सरकार को कोई राहत नहीं दी है और उसके नोटिफिकेशन में कही गई बातें यथावत बनी हुई हैं।
विज्ञापन


इस तरह यह भी साफ हो जाता है कि केजरीवाल ने एक बार फिर तथ्य को मरोड़कर पेश किया है और वह पूरी तरह गलत है।

कनॉट प्लेस से बोला था झूठ

kejriwal lie exposed, the truth about the High Court ruling on ACB

दिल्ली सरकार के सौ दिन पूरे होने पर सरकार ने कनॉट प्लेस पर ओपन कैबिनेट मीटिंग बुलाई थी जिसमें जनता की भी भागीदारी थी। उसी बैठक में केजरीवाल ने सबके सामने दिल्ली हाईकोर्ट का ऑर्डर पढ़ा था।

केजरीवाल ने बताया था कि हाईकोर्ट ने नोटिफिकेशन में गृहमंत्रालय के उस बिंदु को जिसमें दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन पुलिस, केंद्र सरकार के कर्मियों के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकती खारिज कर दिया है।

इसके बाद सभी मीडिया संस्थाओं की तरफ से भी यही बताया गया कि हाईकोर्ट ने गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन के उस बिंदु को खारिज कर दिया है। लेकिन हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई में काफी अलग बात कही थी।

अभी नहीं सुना गया है केंद्र का पक्ष का पक्ष

kejriwal lie exposed, the truth about the High Court ruling on ACB

इन्हीं कारणों से कोर्ट इस मामले में केवल यही फैसला सुनाने को बाध्य थी कि बेल होगी या नहीं। अदालत के संज्ञान में और कोई मुद्दा नहीं था।

जजमेंट के 34वें पैराग्राफ में अदालत ने कहा है कि उसका फैसला केवल बेल एप्लीकेशन को लेकर ही है। इस मामले की सुनवाई में केंद्र सरकार की किसी भी तरीके से हिस्सेदारी नहीं थी।

इस कारण केस में केंद्र सरकार का पक्ष भी नहीं सुना गया। यही वजह है कि बिना केंद्र सरकार का पक्ष सुने उसके नोटिफिकेशन के संवैधानिक पहलू पर फैसला सुनाया ही नहीं जा सकता है।

इसलिए कोर्ट के सुनाए फैसले पर जो बातें अपने आप से केजरीवाल ने मान ली हैं कि अदालत ने गृहमंत्रालय के ‌नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है। ये सरासर गलत होगा क्योंकि अदालत ने अभी तक गृहमंत्रालय का पक्ष नहीं सुना है।

विज्ञापन

गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन पर अदालत ने चर्चा ही नहीं की

kejriwal lie exposed, the truth about the High Court ruling on ACB

इस तरह यहां कोई शंका नहीं रह जाती कि अदालत ने गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन के संवैधानिक पक्ष पर फैसला सुनाया हो या उसे रद्द किया हो।

एक बात जो और ध्यान देने की है वो ये कि जिस ‌नोटिफिकेशन पर इस मामले में चर्चा हुई वो 23 जुलाई 2014 में जारी किया गया था।

यह बात जजमेंट कॉपी के पैरा संख्या 16 में लिखी है। जबकि गृहमंत्रालय का ताजा न‌ोटिफिकेशन 21 मई 2015 को जारी हुआ है। इस ताजा नोटिफिकेशन का केवल रिफरेंस लिया गया था। ये बात जजमेंट के पैरा संख्या 66 में वर्णित है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed