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योगेंद्र ने इस बात के लिए केजरीवाल को ठहराया जिम्मेदार

Sat, 09 May 2015 12:38 AM IST
Updated Sat, 09 May 2015 12:38 AM IST
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Kejriwal had decided to contest 400 seats

बीते संसदीय चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की तरफ से चार सौ से ज्यादा सीटों लड़ने का फैसला अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया का था। इसमें कुमार विश्वास की भी बड़ी भूमिका थी जबकि लोक सभा चुनाव की करारी शिकस्त के बाद अफवाह फैलाई गई कि सारे फैसले के अहम किरदार आप के तत्कालीन रणनीतिकार योगेंद्र यादव रहे।

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इसका खुलासा खुद योगेंद्र यादव ने किया है। पिछले महीने जिन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है। अपनी दलीलों की सच्चाई के बारे में यादव का दावा है कि पहले की सभी बैठकों की रिकार्डिंग मौजूद है।
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योंगेंद्र यादव के मुताबिक, शुरुआत में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना थी। बाद में पार्टी का दबाव पड़ने पर सूची में उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र की चुनिंदा सीटों पर लड़ने का फैसला हुआ।
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योगेंद्र यादव ने माना कि इसके लिए उन्होंने एक प्रस्ताव भी तैयार किया। इसमें सांकेतिक तौर पर गोवा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी प्रत्याशी उतारने की बात थी। उनका प्रस्ताव अधिकतम सौ सीटों पर चुनाव लड़ने का था। लेकिन दिसंबर 2013 की पीएसी की बैठक में अरविंद केजरीवाल ने प्रस्ताव को बकवास बताते हुए खारिज कर दिया।

इनकी थी बड़ी भूमिका किसी की नहीं सुनी

Kejriwal had decided to contest 400 seats

हालांकि कुमार विश्वास प्रस्ताव आगे बढ़ाने को काफी इच्छुक थे। योगेंद्र यादव का दावा है कि इसके बाद उन्होंने दूसरा कोई प्रस्ताव नहीं बनाया। योगेंद्र यादव के मुताबिक, जनवरी-2014 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक तक केजरीवाल ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी नहीं थे। वहीं, बैठक के बाद कुमार विश्वास ने कहा था, वह केजरीवाल को मना लेंगे। फरवरी में दुबारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें केजरीवाल का मन बदला हुआ था।


बगैर किसी गंभीर चर्चा के इसमें केजरीवाल ने कहा कि लोक सभा चुनाव में हमें पूरा दांव लगा देना चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि पहले चरण में 15-20 सीटों की घोषणा करेंगे। बाद में इस सूची को बढ़ाते जाएंगे।

योगेंद्र ने बताया कि फिर उन्हें हरियाणा भेज दिया गया। टिकट वितरण का पूरा मनीष सिसोदिया के जिम्मे दे दिया गया। धीरे-धीरे प्रत्याशियों की सूची चार सौ के पार चली गई। इसका विरोध आप नेता पृथ्वी रेड्डी ने भी किया था। अंतिम निर्णय केजरीवाल और मनीष ने लिया था। इस बाबत एनई या परिषद की बैठक में कोई सहमति नहीं ली गई।

दूसरे कई फैसलों पर भी केजरीवाल की ही चली

Kejriwal had decided to contest 400 seats

योगेंद्र यादव ने बताया कि पिछले दिल्ली चुनाव की जीत के बाद से ही पार्टी में केजरीवाल की मर्जी चल रही है। यादव के मुताबिक, हम व प्रशांत भूषण कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के खिलाफ थे।

लेकिन आम लोगों की राय लेने केफैसले के बाद हमने विरोध नहीं किया। इसी तरह सरकार से इस्तीफा देने से पहले भी पीएसी की कोई बैठक नहीं हुई। हालांकि दस दिन पहले केजरीवाल के पूछने पर हमने कहा था कि हालात इस्तीफे की तरफ जा रहे हैं।

लेकिन इस्तीफे का ऐलान करने से पहले कोई मशविरा नहीं हुआ। नहीं तो इस्तीफा देने से पहले आम लोगों से संवाद किया जाता। योगेंद्र यादव ने बताया कि इसी तरह रेल भवन के धरने के बारे में उन्होंने मना किया था। लेकिन उन्होंने बात सुनने से इंकार कर दिया।

उधर, आम आदमी पार्टी का कहना है कि योगेंद्र यादव के आरोपों पर उन्हें कुछ खास नहीं कहना है। आप नेता संजय सिंह के मुताबिक, योगेंद्र यादव हमारे बड़े भाई है। उन्हें जो भी कहना है वह कहते रहे। हमें उनके साथ आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई में नहीं उलझना है। आम लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें आगे बहुत से काम करने हैं। हम उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।

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