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खेड़कीदौला टोल हटेगा या शिफ्ट होगा संशय बरकरार 

Sun, 05 Feb 2017 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरग्राम Updated Sun, 05 Feb 2017 12:09 AM IST
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Kedkidula toll will shift delete or retain doubt
khedakidaula toll - फोटो : अमर उजाला

साइबर सिटी के औद्योगिक विकास के रास्ते का नासूर खेड़कीदौला टोल प्लाजा को माना जा रहा है। पिछले कई वर्षों से यह टोल उद्योग जगत, रियल एस्टेट, श्रमिक वर्ग व आम आदमी के आंखों की किरकिरी बना हुआ है।

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कुछ दिनों पहले तक लग रहा था कि प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार द्वारा इस टोल प्लाजा को हटाने का निर्णय ले लिया जाएगा। मगर ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। टोल हटेगा या शिफ्ट होगा या ऐसा कुछ भी नहीं होगा इस पर संशय बरकरार है।
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अगर प्रदेश सरकार इस टोल को हटाना चाहती है तो उसे 600 करोड़ रुपये टोल कंपनी को देना होगा । चर्चा है कि इसमें से करीब 200 करोड़ रुपये मानेसर के उद्यमियों को वहन करना पड़ेगा। उद्योग जगत में इसे लेकर खलबली मची हुई है। 
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टोल कंपनी खेड़कीदौला टोल प्लाजा को हटाने के एवज में 1800 करोड़ रुपये की डिमांड कर रही है। प्रदेश सरकार की मंशा थी कि इस टोल को हटाने के लिए फंड की व्यवस्था विभिन्न सरकारी एजेंसियों से करने के साथ-साथ मानेसर के उद्यमियों से भी करीब 200 करोड़ की आर्थिक  मदद ली जाए।


इससे योजना भी आगे बढ़ती हुई दिखाई नहीं दे रही है। वहीं मानेसर के उद्यमियों का अब कहना है टोल हटाने में आना वाले खर्च में उद्योगों को नहीं लपेटा जाए। यह उचित नहीं है।


उद्योगों को काम का बेहतर माहौल देना प्रदेश सरकार का काम है। इसे हटाने के खर्च का वहन प्रदेश सरकार को ही करना चाहिए। आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने कहा कि प्रदेश सरकार अगर चाहे तो टोल प्लाजा को हटाने में समय नहीं लगेगा।


उसे उद्यमियों पर इसके लिए आर्थिक बोझ डालने की भी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लेबर वेलफेयर फंड के नाम पर उद्योगों से प्रति लेबर हर माह पांच रुपये वसूलती है। प्रदेश सरकार के इस फंड में दो हजार करोड़ रुपये जमा हैं। जो लेबर के कल्याण पर खर्च होता दिखाई नहीं दे रहा है।


इसके अलावा बिल्डरों से ईडीसी और आईडीसी के नाम पर काफी राशि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा वसूली जाती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो 200 करोड़ नगर निगम से, 200 करोड़ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से और 200 करोड़ रुपये लेवर वेलफेयर बोर्ड के फंड से दे सकती है।


इसमें कोई मुश्किल भी नहीं आएगी। टोल प्लाजा के कारण लेबर वर्ग को भी काफी परेशानी आती है। टोल हटने से औद्योगिक विस्तार होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

 

खेड़कीदौला टोल प्लाजा को हटाने के लिए उद्योगों पर आर्थिक बोझ को डालने के मुद्दे पर उद्यमियों में सहमति नहीं है। इस मुद्दे पर मानेसर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों की इसी माह बैठक होगी। इसके बाद  निर्णय लिया जाएगा। यह बात सही है कि उद्योगों पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। 
...राजेश गुप्ता, महासचिव मानेसर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन

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