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Delhi NCR News: चीनी वीजा मामले में कार्ति चिदंबरम की याचिका खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की याचिका खारिज कर दी। यह याचिका कथित चीनी वीजा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को टालने के लिए दायर की गई थी। शिवगंगा से सांसद कार्ति चिदंबरम ने अदालत से मांग की थी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने की सुनवाई तब तक रोकी जाए, जब तक कि इससे जुड़े मूल मामले यानी सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे वीजा घोटाले में आरोप तय नहीं हो जाते। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि अब यह याचिका बेकार हो गई है, क्योंकि ट्रायल कोर्ट पहले ही सीबीआई मामले में आरोप तय कर चुका है। इसके बाद न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
इससे पहले, ट्रायल कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को कार्ति की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आरोपों पर बहस टालने की मांग की थी। उसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी याचिका का विरोध किया। ईडी का कहना था कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला और मूल अपराध (सीबीआई मामला) अलग-अलग चलते हैं और एक को दूसरे से जोड़कर नहीं रोका जा सकता। कार्ति चिदंबरम की ओर से दलील दी गई थी कि मनी लॉन्ड्रिंग केस का आधार ही मूल अपराध है।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की याचिका खारिज कर दी। यह याचिका कथित चीनी वीजा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को टालने के लिए दायर की गई थी। शिवगंगा से सांसद कार्ति चिदंबरम ने अदालत से मांग की थी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने की सुनवाई तब तक रोकी जाए, जब तक कि इससे जुड़े मूल मामले यानी सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे वीजा घोटाले में आरोप तय नहीं हो जाते। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि अब यह याचिका बेकार हो गई है, क्योंकि ट्रायल कोर्ट पहले ही सीबीआई मामले में आरोप तय कर चुका है। इसके बाद न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
इससे पहले, ट्रायल कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को कार्ति की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आरोपों पर बहस टालने की मांग की थी। उसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी याचिका का विरोध किया। ईडी का कहना था कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला और मूल अपराध (सीबीआई मामला) अलग-अलग चलते हैं और एक को दूसरे से जोड़कर नहीं रोका जा सकता। कार्ति चिदंबरम की ओर से दलील दी गई थी कि मनी लॉन्ड्रिंग केस का आधार ही मूल अपराध है।
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