दिल्ली के युवा हाथों ने ठान लिया कि सड़क को सुंदर बनाएंगे और ले आए हरियाली
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दिल्ली के करावल नगर रोड के डिवाइडर पिछले दस साल से वीरान पड़े हुए हैं। निगम के अधीन आने वाली इन सड़कों पर पेड़-पौधे लगाना तो दूर निगम की ओर से कभी सफाई भी नहीं कराई जाती थी। सड़कों के बीच बने डिवाइडर पर लोगों ने कूड़ा-कचरा फेंकना शुरू कर दिया और गंदगी ने यहां अपना ठिकाना बना लिया। कुछ दिनों में जब डिवाइडर पर पड़े कचरे के कारण दुंर्गध आने लगी, तो क्षेत्रीय युवा ने डिवाइडर को कचरामुक्त कर सुंदर बनाने की ठानी।
डिवाइडर पर पौधे लगाने के लिए स्थानीय युवा कमल ने पहले बीस पौधे चंदू नगर गली नंबर तीन के डिवाइडर पर लगाए। चूंकि यहां आवारा पशु घूमते रहते हैं तो अगले दिन गाय पौधे खा गई। कमल ने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाए कि पेड़ भी जीवित रहें और डिवाइडर पर सुंदर लगे। उसने क्षेत्रीय दुकानदारों से बात की लेकिन कुछ सहमत हुए कुछ असहमत। आखिर कमल ने इस अभियान को खुद अकेला पूरा करने की ठान ली।
वह सरकारी नर्सरी पहुंचा और सौ पेड़ ले आया। अब समस्या यह थी कि इन पेड़ों को अगर लगा दिया जाए, तो गाय खा जाएगी, इनकी सुरक्षा और सिंचाई की व्यवस्था किए बिना पेड़ लगाने का कोई फायदा नहीं। कमल ने फिर स्थानीय दुकानदारों से बात की, तो करीब चार हजार रुपया इकठ्ठा हो गया। कुछ कलेक्शन आने के बाद हौंसला बढ़ा, तो कमल ने पेड़ों की फेसिंग के लिए अपनी जेब से 15000 रुपये खर्च कर लोहे का जाल और सिंचाई के कनेक्शन के लिए पानी का स्थायी कनेक्शन करवा दिया।
जुलाई में करावल नगर रोड पर चंदू नगर के डिवाइडर पर पेड़ लगवाए गए। स्थानीय लोगों ने काम को सराहा और डिवाइडर से गंदगी भी खत्म हो गई। काम को मिली सराहना के बाद कमल का जोश दोगुना हो गया और उसने मन ही मन तय कि इस काम को आगे भी जारी रखेंगे। बरसात के मौसम में पेड़ों को मिले पर्याप्त पानी के कारण पेड़ पनप गए और वह तीन से चार फुट तक बढ़ गए। सड़क पर आई हरियाली देखकर कमल का हौंसला बढ़ गया।
पेड़ों की सिंचाई के लिए लगाई गई पानी की पाइपलाइन में बरसात के कारण अवरोध आ गया, तो कमल उसे ठीक करने लगा। इसी बीच स्थानीय युवा अनूप उनके पास आए और मदद की बात कही। यहीं से कमल के साथ अनूप जुड़े। अनूप और कमल ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अपने दोस्तों से बात की तो रमेश मास्टर जी, सुशील, हरकेश, विक्रम,राघव, दीपक, सहित बीस युवा उनके साथ जुड़ गए। अब ये अभियान अकेले कमल का न होकर एक मिशन बन गया।
एक वाट्सऐप ग्रुप तैयार किया गया जिसे नाम दिया गया 'ट्री माय फ्रेंड' और शुरू हो गया रोड पर पौधे लगाने का अभियान। चूंकि इनमें से ज्यादातर युवा सरकारी महकमे में कार्यरत्त हैं, तो तय हुआ कि सरकारी अवकाश वाले दिन पौधारोपण किया जाएगा। अगस्त में बकरीद के दिन ये सभी युवा करावल नगर रोड चंदू नगर गली नंबर दो पर एकत्र हुए और डेढ सौ फुट लंबे डिवाइडर से कूड़ा हटाया, मिट्टी खोदी, पानी की पाइपलाइन बिछवाई, पेड़ लगाए और उनकी सुरक्षा के लिए लोहे की जाल की फेंसिंग भी करवा दी। उनके काम को देखकर स्थानीय दुकानदार भी आगे आए।
किसी ने पानी के कनेक्शन को पक्का करवा दिया। किसी ने आर्थिक मदद की, तो कोई पेड़ लगवाने में जुटा रहा। युवाओं ने सौ पौधे लगाकर डिवाइडर की गंदी को खत्म किया तो उनके काम की चर्चा क्षेत्र में होने लगी। पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था होने के कारण पेड़ फल-फूल गए और जो डिवाइडर गंदगी से पटा रहता था वो अब हरा-भरा हो चुका है।
गांधी जंयती के दिन भी इन युवाओं ने करावल नगर रोड संध्या पब्लिक स्कूल के सामने वाले डिवाइडर पर अभियान को चलाया और 150 पौधे इसी तकनीक से लगाकर महात्मा गांधी को नमन किया। अब तक ये युवा करीब पांच सौ फुट डिवाइडर पर पौधे लगा चुके हैं। युवाओं का कहना है कि पानी के स्थायी कनेक्शन और पेड़ों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाने से लाभ ये होता है कि सिंचाई और सुरक्षा दोनों हो जाती हैं। युवाओं ने अपना एक ग्रुप ट्री माय फ्रेंड भी बना लिया, जिसके तहत वो अभियान को चला रहे हैं। युवाओं का कहना है कि सरकारक या जनप्रतिनिधि मदद करें न करे। हम इस अभियान को क्षेत्र से निकालकर पूरी दिल्ली में फैला देंगे। उनका अगला अभियान 25 दिसंबर को चलेगा। युवाओं का ये ग्रुप अब तक तीन बार पौधारोपण कर चुका है।