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#कबतकनिर्भयाः हैदराबाद की घटना पर अमर उजाला ने जानी हर शहर के दिल की बात

Wed, 04 Dec 2019 06:53 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 04 Dec 2019 06:53 PM IST
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kab tak nirbhaya amar ujala aprajita mission takes views of different cities girls
कब तक निर्भया - फोटो : अमरअमर
देशभर में महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन अपराधों पर पूरे देश में गुस्सा है। बलात्कार और यौन हिंसा जैसे जघन्य अपराध में लिप्त अपराधियों को सख्त सजा देने की मांग हर ओर से उठ रही है। अमर उजाला ने अपराजिता अभियान के तहत महिलाओं की समूह चर्चा में न्याय में देरी का मामला जोर-शोर से उठाया। महिलाओं ने कहा कि अब उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं तत्पर रहना होगा। किसी भी अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी होगी। जानिए क्या बोलीं अलग-अलग शहरों की बेटियां और क्या चाहती हैं वो....
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आगरा

हैदराबाद में महिला डॉक्टर की हत्या से मैनपुरी की महिलाओं में भी आक्रोश है। मंगलवार को अपराजिता अभियान के तहत अमर उजाला आगरा कार्यालय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने बेबाकी से विचार रखे। महिलाओं ने जहां शासन और प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी प्रकट की।

वहीं अभिभावकों को बेटों को संस्कारवान बनाने की भी नसीहत दी। अपराजिता के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि बेटियों के साथ अत्याचार करने वालों को सजा सुनाने में न्यायालय को ट्रायल करने की कोई जरूरत नहीं है। कानून में बदलाव करते हुए अपराधियों को कठोर से कठोर सजा सुनानी चाहिए। 

बालक कल्याण समिति की सदस्य आराधना गुप्ता ने कहा कि बालिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है। बालिकाओं को घूरने तथा उनके साथ दुष्कर्म जैसी घटनाओं को करने वालों को बीच चौराहे पर सजा देनी चाहिए। ऐसे लोगों के साथ दंड देने में शासन और प्रशासन को देरी नहीं करनी चाहिए। 

सभासद मधु यादव ने कहा कि बालिकाओं के साथ अपराध रोकने के लिए मोमबत्ती से काम नहीं चलेगा। इसके लिए अपराध करने वालों को सजा सुनाने में शासन और प्रशासन को देरी नहीं करनी चाहिए। जानकारी होने के 24 घंटे के अंदर अपराधी को कठोर से कठोर सजा सुनानी चाहिए। 

अधिवक्ता तूलिका अग्रवाल ने कहा कि दुष्कर्म की शिकार बेटी को जलाने वाले नरपिशाचों के लिए फांसी तो बहुत आसान सजा है। दुष्कर्म के आरोपियों को एक हाथ एक पैर काट कर और नपुंसक बना कर समाज के बीच छोड़ देना चाहिए। ताकि वो भी पल-पल उस यातना को झेले जो दुष्कर्म पीड़िता ने सहन की थी। 

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मिली अग्रवाल ने कहा कि समाज में नैतिक पतन के कारण इस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं। बेटियों को सबल बनाने की जरूरत है। कानून इतना सख्त बनाया जाए कि अपराधियों का मनोबल टूटे। दुष्कर्म के मामलों में सुनवाई जल्द से जल्द हो। लचर कानून का ऐसे लोग लाभ उठाते हैं। 

मेरठ

मुजफ्फरनगर में एसडी कॉलेज ऑफ कॉमर्स में आयोजित समूह चर्चा की शुरुआत विधि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकुल गुप्ता ने कानूनी जानकारी से की। उन्होंने कहा कि महिला अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए। डायरेक्टर डॉ. मंजू मल्होत्रा, डॉ. छवि जैन, गरिमा तोमर, काजोल, मानसी, सोनिका गर्ग, प्रीति दीक्षित, प्राची, शिवानी, रुखसार आदि ने दुष्कर्म के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। साथ ही महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की वकालत की।

हैदराबाद की घटना एक विक्षिप्त मानसिकता है। यह केवल किसी एक प्रयास से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से दूर होगी। सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करे और उनमें न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करें। - डा. मुकुल गुप्ता, सहायक प्राध्यापक (विधि)

 

निर्भया कांड के बाद जो कानून बने वे काफी सख्त हैं, लेकिन उनका पालन सख्ती से नहीं हो रहा। कानून को सख्ती से पालन कराने की जरूरत है। 
- डा. मंजू मल्होत्रा, डायरेक्टर।


महिलाओं को सम्मान देने की बात तो सब करते हैं, लेकिन व्यवहार में कोई नहीं लाता। परिवार से ही इसकी शुरुआत होनी चाहिए।
- प्राची, शिक्षिका।


जरूरत संस्कार युक्त शिक्षा की है। स्कूल-कॉलेजों में छात्रों को मोरल एजुकेशन दी जाए। घरों में भी माता-पिता लड़कों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।
- चंदना दीक्षित, शिक्षिका। 

 

दुष्कर्म जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानून की आवश्यकता है। दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी तो अन्य लोग भी इससे सबक लेंगे।
- मानसी अरोरा, शिक्षिका


परिवार के लोग केवल लड़कियों के लिए बंदिशें लगाते हैं, लेकिन बेटों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बेटों को अच्छे संस्कार मिलेंगे तो इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी।
 - सोनम चौहान, शिक्षिका

दुष्कर्म जैसी घटना के आरोपियों को अधिवक्ता की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। समाज को उनका बहिष्कार करना चाहिए, तभी इस तरह की घटनाएं रुकेंगी।
 - एकता मित्तल, शिक्षिका।

कानून में बदलाव का उसे और सख्त बनाने की जरूरत है। साथ ही कानून का कड़ाई से पालन भी होना चाहिए। केवल कानून बनाने मात्र से कुछ नहीं होगा। 
- आकांक्षा पाल, शिक्षिका

हैदराबाद की घटना के दोषियों को जेल में मटन-चिकन खिलाया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। दोषियों को सार्वजनिक रूप से सजा दी जानी चाहिए। 
- पूर्वी, शिक्षिका


समाज से मोरल वेल्यू खत्म होती जा रही है। बच्चों को अच्छे संस्कार दें साथ ही सरकार महिला अपराधों को लेकर सख्त कानून बनाए। - रेनू, शिक्षिका
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कानपुर

हैदराबाद में डाक्टर से गैंगरेप और बलात्कार पर फिल्म और टीवी कलाकार आशुतोष राणा और मेघना मलिक ने चिंता जताई। उनका कहना था कि फिजूल की नारेबाजी से कुछ नहीं  होने वाला। ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए अपराधियों को सख्ती से रोका जाना चाहिए। सबसे अधिक जरूरत जागरुकता की है। लोगों को जागरूक किया जाए जिससे उनका माइंड सेट बदले। महिलाओं के खिलाफ बलात्कार जैसी आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए बहुत ईमानदारी और सख्ती के साथ सोशल प्रेशर बनाया जाना चाहिए। ऐसी घटनाएं कानूनी कार्रवाई के साथ सोशल प्रेशर से रुकेंगी।

कानपुर में गौरहरि सिंघानिया इंस्टीट्यूट में आयोजित केएलएफ-2019 के आखिरी दिन रविवार को आशुतोष राणा और टीवी सीरियल ‘न आना इस देश लाडो’ की अम्मा जी फेम मेघना मलिक ने हैदराबाद प्रकरण को अति दुखद घटना बताया और कहा कि माता के अस्तित्व पर लोग खुद कुठाराघात कर रहे हैं।
 

गुरुग्राम

हैदराबाद में चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या कर जलाने के मामले को लेकर गुरुग्राम में भी छात्राओं में काफी रोष है। छात्राओं का कहना है कि बढ़ते दुष्कर्म के मामलों को लेकर बार-बार कानून में संशोधन की मांग उठती है, वर्तमान में कानून के प्रावधान दोषियों को कठोर सजा देने में समक्ष है, लेकिन उस पर सख्ती से अमल करने की जरूरत है। दोषी कानून की खामियों को फायदा उठाकर सजा से बच रहे हैं। यही कारण है कि सात वर्ष पहले निर्भया से साथ दरिंदगी करने वाले दोषियों को मिली फांसी की सजा पर अमल नहीं हो पाया।गुरुग्राम सेक्टर-9 स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने हैदराबाद की महिला चिकित्सक के साथ हुई दरिंदगी पर रोष प्रकट किया है।

क्या बोलीं बेटियां
निर्भया मामले में सात साल बाद भी दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है। यह तथ्य अपराधियों के दिमाग से सजा के खौफ को समाप्त कर देता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि न्यायपालिका के फैसले पर जल्द अमल हो। हैदराबाद मामले के दोषियों को तत्काल फांसी होनी चाहिए। - सोनम यादव, छात्रा 

जब भी ऐसे मामले होते हैं, लोग सांकेतिक विरोध जताना शुरू कर देते हैं। प्रोफाइल पिक्चर, स्टेटस लगाने से अपराधियों के हौसले पस्त नहीं होंगे। कानून में बार-बार संशोधन से भी उनमें डर पैदा नहीं होगा। दोषियों को जल्द सजा मिले तभी उनमें डर बनेगा। - अक्षमा, छात्रा 

दुष्कर्म के मामलों में मात्र सजा से कुछ नहीं बदलने वाला। बदलनी होगी ऐसे लोगों की मानसिकता। हर व्यक्ति लड़कियों को दोष दे देता है। इस प्रकार की मानसिकता वाले लोगों के अलावा समाज में जागरूकता लानी होगी। सभी को यह समझना होगा कि महिलाओं को भी समान अधिकार है। - अमानत, छात्रा 

कैंडल मार्च से कुछ नहीं होने वाला है। अपराधी कानून में खामियों का फायदा उठाते है ऐसे में कानून में जो खामी है, उसको दूर करने की दिशा में सरकार को कदम उठाने चाहिए। अपराधियों के साथ हमदर्दी या उनके समर्थन में बयान जारी करने वालों पर भी मुकदमा चलाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। - पूजा, छात्रा

झांसी

हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत के विरोध में अमर उजाला की ओर से झांसी के इलाइट चौराहे से शाम पांच बजे से कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च रानी लक्ष्मीबाई पार्क पर पहुंचकर समाप्त हुआ। 

इसके साथ ही अमर उजाला संवाद में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. कंचन जायसवाल, जिला अधिवक्ता संघ के सचिव प्रणय श्रिवास्तव, सेवानिवृत्त उप निदेशक (शिक्षा) नीना उदैनिया, बिपिन बिहारी महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डा. एमएम पांडेय, मेडिकल कालेज के सर्जन डा. पंकज सोनकिया, क्रिमिनल एडवोकेट रजनी जैन, समाजसेवी आकांक्षा रिछारिया, इंजीनियरिंग कॉलेज की डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. शहनाज अयूब, बुंदेलखंड प्राइवेट टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. फिरोज खान, समाजसेवी प्रदीप तिवारी, पार्षद अंशू राय व डॉ. नीलम आनंद मौजूद रहीं।

उत्तराखंड

अमर उजाला अपराजिता संवाद में छात्राओं को यौन हिंसा से लड़ने के यही सूत्र दिए गए। छात्राओं को बताया गया कि कैसे वह यौन हिंसा के मामलों में कानूनी मदद लेते हुए दोषियों को उनके किए की सजा दिलवा सकती हैं। देहरादून के अमर उजाला कार्यालय पटेलनगर में समाधान एनजीओ संचालक व यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को मदद उपलब्ध कराने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेनू डी सिंह ने छात्राओं को आवश्यक जानकारियां प्रदान की।

उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के अपराध से लड़ने के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा। कार्यक्रम में विप्लवी मालाकर, शैली शर्मा, अचला ढौंडियाल, तनुजा पाल, प्रेरणा आर्या, अंजली ठाकुर, किरन, मानसी राणा, सुष्मिता डोटियाल, वैष्णवी विंद्रु, मेहजबीन सिद्दकी, प्रेरणा सागर, मानसी शर्मा, मुस्कान पांडे, इरम त्यागी और निशी भाटिया भी मौजूद रहीं।

क्या बोलीं बेटियां

सेक्स एजुकेशन पर बात करने से आज भी लोग हिचकिचाते है। जबकि इस पर खुलकर बात करने की जरूरत है और यह बात लड़कियों को बचपन में ही बतानी चाहिए। कई बार माता-पिता ही इससे हिचकिचाते है। ऐसे में स्कूल से यह पहल की जानी चाहिए। अनिवार्य रूप से स्कूलों में लड़कियों को गुड टच और बैड टच के बारे में पता होना चाहिए। अगर शुरू से ही हमें गुड टच और बैड टच पता हो तो बहुत सी चीजों को पहले ही रोका जा सकता है।- मानसी, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी

लड़कियों की सीमाएं तय कर दी जाती है, लेकिन सीमाएं हमारी तय की जरूरत नहीं है। जब भी किसी लड़की के साथ गलत होता है तो सारे नियम लागू हम पर किए जाते है। रात को घर जल्दी आना, कपड़े ठीक से पहनना, ज्यादा दोस्तों के साथ न रहना। इससे तो ऐसा लगता है कि गलत हमने किया है।- शाहीनबानो, एसजीआरआर

हैदराबाद में जो एक बेटी के साथ हुआ उससे सभी लोगों में आक्रोश है, लेकिन यह एक बड़ी हकीकत है कि यह हल्ला कुछ दिनों तक होता है। लोग सुनते है और फिर कुछ दिनों बाद सब अपने में व्यस्त हो जाते है। लोगों का गुस्सा देख एक बार मामले का संज्ञान ले भी लिया जाता है, तो जब तक उस पर फैसले का समय आता है तब तक हमारे लोगों का गुस्सा भी शांत हो जाता है। और मामला फिर ठंडा पड़ जाता है। इसलिए पहले लोगों को भी इस संवेदनसील मुद्दे के गहरायी को समझने की जरूरत है।- वैष्णवी, एसजीआरआज कालेज

लड़कियों के मामले कई बार पुलिस भी गंभीरता नहीं दिखाती है। जिस कारण अपराधियों में कानून का डर नहीं होता है। कानून का खौफ न होना हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। इसलिए पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के साथ कानून को भी सख्त होने की जरूरत है।- इरम त्यागी, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी

हर वार्ड में एक हेल्पलाइन होनी चाहिए, ताकि किसी भी वक्त जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके। इसके अलावा हर जगह लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उनकी निर्भरता यह नहीं होनी चाहिए कि कोई उनकी मदद के लिए आएगा। बल्कि उन्हें इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वह अपनी मदद स्वयं करें।- निशा भाटिया, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी

हिमाचल प्रदेश

अमर उजाला के शिमला कार्यालय में ‘कब तक निर्भया’ संवाद में महिलाओं, छात्राओं और पार्षदों ने बेबाकी से विचार रखे। अब बच्चों को घर में भी संस्कार देने की जरूरत है। कहा कि न जाने कितनी निर्भया को दरिंदों ने दुष्कर्म के बाद मौत के घाट उतार दिया होगा। कुछ ही मामले सार्वजनिक हो पाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। सेक्स एजुकेशन को बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में सेल्फ डिफेंस की तकनीक और स्पोर्ट्स विषय अनिवार्य करना होगा।

दुष्कर्म की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पहले आने वाली पीढ़ी की प्रवृति में बदलाव लाना जरूरी है। यह तभी संभव हो सकता है जब शिक्षा में बदलाव लाया जाए। स्कूल में लड़कों और लड़कियों के बीच कोई लकीर नहीं खिंची जानी चाहिए। कानून में भी बदलाव लाना जरूरी है। बेटियों के साथ अगर गलत होता है तो उन्हें शिकायत करने दें, रोकें नहीं। -रिद्धि, डीएवी सीपीएस की छात्रा

 

सरकारी और निजी स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि स्टूडेंट एक दूसरे के जेंडर को जाने और फर्क समझें। क्या भला है क्या बुरा है, इसकी पहचान करें। छेड़छाड़ के मामलों में पीड़िता को आगे आना चाहिए। लड़कों को भी स्कूल में ही एजुकेट किया जाना चाहिए। महिला के साथ गलत होने पर खुल कर सामने आना होगा। -अकांक्षा कटोच, दसवीं की छात्रा

 

लड़कियां अपने को किसी से अलग न समझें। हम अगर लड़कियों को ऐसे मामलों में जागरूक करते हैं तो लड़कों को भी जागरूक करना जरूरी है ताकि उन्हें सही गलत का फर्क मालूम हो। दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के पीछे नशा एक मूल कारण है। लड़के और लड़कियों को फ्रेंडशिप में अपना दायरा समझना चाहिए। परिजनों को अपने बच्चों को समझाना होगा। काउंसलिंग करनी होगी। -राजेश्वरी सिंह, शिक्षिका

 

स्कूलों में स्पोर्ट्स और सेल्फ डिफेंस अनिवार्य होना चाहिए। इससे छात्र-छात्राओं को मानसिक और शारीरिक मजबूती मिलेगी। एक स्त्री और पुरुष में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाता, हमेशा से ही भेदभाव हो रहा है। इसे पाटना है। बेटों को नारी का आदर करना सिखाएं। समाज की सोच को बलना होगा। बच्चे नशेड़ी हैं तो  अभिभावकों को उनसे बात करनी पड़ेगी। समझाना होगा। -अलकनंदा हांडा, पार्षद एवं एडवोकेट

 

बच्चों को संस्कारी बनाना होगा। बेटा-बेटी को समान समझते हुए दोनों को एक समान सहूलियत देनी होगी। पुरुष स्त्री का फर्क खत्म करना होगा। महिला समाज में एक प्रमुख अंग है, उसका आदर और सम्मान होना चाहिए। महिला अपने बच्चों को घर से ही अच्छे संस्कार डालें। बेटा बेटी को एक समान जीने का अधिकार होना चाहिए। सरकार नशाबंदी पर कदम उठाए। -उर्मिला शर्मा, पार्षद

 

अभिभावक बेटा-बेटी में फर्क न समझें और न ही अलग-अलग व्यवहार करें। अपने छोटे और युवा बच्चों को जरूरत से ज्यादा पैसे न दें क्योंकि बच्चे इसका गलत इस्तेमाल कर नशाखोर बनते हैं। महिलाओं से हो रहे दुष्कर्म मामलों में कानून सख्त होना चाहिए। दोषियों को फांसी होनी चाहिए। इससे सभी गलत करने वाले लोगों को इस का भय बना रहेगा। -नीलम शर्मा, पार्षद 

 

दुष्कर्म के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। दोषियों को सार्वजनिक सजा होनी चाहिए ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए समाज को जागरूक करना होगा। सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा ताकि इस भयानक मुद्दे पर एकजुट होकर समाज को जागरूक किया जाए। महिला की गरिमा को ठेस न पहुंचे। सबसे पहले परिवार से जागरूकता की अलख जगानी होगी। -निर्मला शर्मा, पार्षद



 

जम्मू-कश्मीर

हैदराबाद में महिला डॉक्टर का अपहरण, दुष्कर्म और जलाकर हत्या करने के मामले ने जम्मू के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। समाज को शर्मसार कर देने वाली इस दरिंदगी के खिलाफ बेहद आक्रोश है। इस घटना के बीच महिला सुरक्षा पर रविवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू की प्रबुद्ध महिलाओं ने व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए।

इस घटना ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया। इन सभी घटनाओं की वजह है समाज में जागरूकता का अभाव। हमें घर से ही इस बारे में जागरूकता लाने का काम करना चाहिए। दोषियों को नपुंसक बनाकर सभी सोशल मीडिया और अखबारों की सुर्खियों में लाया जाना चाहिए ताकि कोई भी ऐसी हरकत करने के बारे में सोचे भी नहीं।- डॉ अमिता मेहता, साहित्यकार

सिर्फ किसी एक को बदलने से कुछ नहीं होगा, जरूरत है समाज की सोच को बदलने की। इन सभी घटनाओं को तभी रोका जा सकता है जब हम हर क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिश करें। स्कूलों में सेल्फ डिफेंस सिखाया जाना चाहिए। टेक्नॉलाजी भी इसमें काफी अच्छी भूमिका निभा सकती है। सरकार को चाहिए कि जिन आईआईटी पर वह इतना पैसा लगाते हैं उन्हें यह काम सौंपा जाए कि वह ऐसे डिवाइस तैयार करें जिससे महिलाएं कहीं भी 5 से 10 मिनट के अंदर किसी को मदद मिल सके। - डॉ श्वेता कोहली, असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू


ऐसी हर घटना के बाद कड़ा कानून बनाने की बात होती है। समय के साथ कई नए कानून भी आए पर बदला कुछ नहीं। आज भी महिलाओं के साथ गलत हो रहा है। हमारे समाज में शक्ति को पूजा जाता है पर यह सब केवल नाममात्र है। जब भी ऐसी कोई घटना सामने आती है तो उसे धर्म-जाति और राजनीति का मुद्दा बना दिया जाता है। इसे बंद किया जाना चाहिए। जरूरत है पुलिस के काम में सुधार लाने की। लोग पुलिस के पास जाने से डरते हैं। इसके बारे में भी लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। - मोनिका कोहली, वकील, जम्मू हाईकोर्ट

हम बात करते हैं कि नैतिक कर्तव्यों के  बारे में बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। दुष्कर्म के कई मामलों में यह दलील दी जाती है कि वह नाबालिग है। जब वह दुष्कर्म जैसा घिनौना काम कर सकता है तो नाबालिग कैसे हुआ। जब तक हम दोषियों को सजा नहीं देंगे तब तक समाज में सुधार नहीं आ सकता। इन घटनाओं में इंटरनेट का भी योगदान है। इसके प्रयोग पर ध्यान देने की जरूरत है। - देविंद्र कौर मदान, सामाजिक कार्यकर्ता

हाई कोर्ट की तरफ से रोजाना कोई न कोई ऑर्डर जारी होता है। लेकिन धरातल पर उसे लागू नहीं किया जाता। आठ हजार से ऊपर ऐसे केस हैं जिनके अहम फैसले अभी तक लागू नहीं हो सके हैं। हम पुलिस वाले भी कहीं न कहीं दोषी हैं। 10 से 12 विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के टेस्ट केस लेने चाहिए। दावा है कि उनमें से 3-4 लोग भ्रष्ट निकलेंगे। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि लोगों में सजा का डर बन सके और इस तरह कोई हरकत करने से पहले जरूर सोचें। - शशि ठाकुर, डीएसपी, जेएंडके पुलिस


हम स्कूलों में सिर्फ लड़कियों को ही गुड-टच और बैड-टच के बारे में क्यों बताते हैं। हमें लड़कों को भी इसके बारे में बताना चाहिए। पुलिस में सुधार लाने से पहले हमें समाज में सुधार की आवश्यकता है। सबसे ज्यादा दुष्कर्म मामले आज के दौर में टेक्नालाजी की वजह से हो रहे हैं। एक मां ही है जो अपने बच्चों को अच्छे से समझती है। इस वजह से बच्चे को जागरूक करने में उसकी अहम भूमिका हो सकती है। बेटों को बदलने की जरूरत है बेटियों को नहीं। - सुषमा गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष रोटरी क्लब
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