सीनियर्स के बोझ तले दबे हैं हम, क्यों न करें खुदकुशी...
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ज्ञात हो मूलरूप से ओडिशा का रहने वाला डॉ. सिद्धार्थ अपने साथी डॉक्टरों सचिन व डॉ. अभिषेक के साथ 1/9 पुराने राजेंद्र नगर में किराये के फ्लैट में दूसरी मंजिल पर रहता था। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मई 2017 में सिद्धार्थ आरएमएल अस्पताल के एनेस्थेसिया विभाग में तैनात हुए।
पिछले कुछ दिनों से डॉ. अभिषेक अपने परिवार से मिलने झारखंड गए हुए थे। रविवार रात दिन में ड्यूटी के बाद सिद्धार्थ फ्लैट पर पहुंचे जबकि सचिन नाइट शिफ्ट करने चला गया। सोमवार सुबह 8.25 बजे सचिन फ्लैट पर आया तो उसने देखा कि मेन गेट खुला हुआ था।
अंदर कमरे में पंखे के हुक से सिद्धार्थ ने अपनी पैंट का फंदा बनाकर फांसी लगा रखी थी। खबर मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस को डॉक्टर के कमरे से बिना हस्ताक्षर किया हुआ अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट बरामद हुआ।
लेडी हार्डिंग अस्पताल के एनिस्थिसिया विभाग के डॉक्टर जयप्रकाश टांक भी स्ट्रेस में जी रहे हैं। डॉक्टर जयप्रकाश ने बताया कि वह इन दिनों एंटी-डिप्रेशन दवाइयों पर हैं। डॉ जयप्रकाश का आरोप है कि उनसे 36 घंटे की ड्यूटी ली जाती है। शिकायत पर कहा जाता है कि काम करना है तो करो, नहीं तो अपना इस्तीफा मेज पर रख दो। इतना ही नहीं, फेल करने तक की धमकी दी जाती है।
आरटीआई के तहत हासिल की ड्यूटी चार्ट
इसके अलावा आईसीयू में एक सप्ताह के दौरान 60 घंटे ड्यूटी करने की बात कही गई है, जबकि एमसीआई के नियमों के मुताबिक एक हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में डायरेक्टर के पास शिकायत की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
परेशान होकर भी रहना पड़ता है शांत
इनका कहना है कि परेशान होते हैं लेकिन भविष्य के बारे में जब सोचते हैं तो चुप रहना पड़ता है। इनका पूरा भविष्य अस्पताल प्रबंधन और प्रोफेसर्स पर है। रेजिडेंट डॉक्टर्स ने बताया कि कुछ प्रोफेसर वाकई ही काफी अच्छे हैं, ये उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास भी करते हैं। लेकिन कुछ इन्हें डराते-धमकाते हैं।
प्रताड़ित डॉक्टरों का दर्द साझा करेगा एम्स
इसे खत्म करने के लिए अब एम्स में लेट्स टॉक प्रोग्राम नाम से एक कार्यक्रम शुरू होने वाला है। जिसके तहत परेशान डॉक्टर अपना दर्द साझा कर सकते हैं। इनकी पूरी मदद की जाएगी। वहीं, पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय गुर्जर ने बताया कि इसके तहत एक कमेटी बनेगी, जो कि डॉक्टर की पूरी मॉनीटरिंग करेगी। इतना ही नहीं, जरूरत पडने पर प्रताड़ित डॉक्टर को मनोचिकित्सक की सलाह भी उपलब्ध हो सकेगी।