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पांच करोड़ रुपये बीमे में निवेश मामला: एलआईसी एजेंट चौहान की न्यायिक हिरासत बढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:04 AM IST
सार
वीरभद्र सिंह के पांच करोड़ रुपये बीमे में निवेश करवाने का आरोप
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़े पांच करोड़ के मनी लॉंड्रिंग मामले में आरोपी बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान की न्यायिक हिरासत कोर्ट ने बृहस्पतिवार को 20 जनवरी 2017 तक बढ़ा दी। चौहान की जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। इस पर फैसला आने के बाद आरोपों पर बहस शुरू होगी।
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पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने आनंद चौहान की न्यायिक हिरासत 20 जनवरी 2017 तक बढ़ा दी। प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से आठ जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया था।
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बता दें कि चौहान पर वीरभद्र सिंह के पांच करोड़ रुपये जीवन बीमा में निवेश करवाने का आरोप है। अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर सात सितंबर 2016 को संज्ञान लेते हुए कहा था कि उसे इस मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार है। एजेंसी ने तीन हजार पन्नों की चार्जशीट मनी लॉंड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत दाखिल की थी।
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ऐसे आया था आयकर विभाग की नजर में
एजेंसी का आरोप है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह से 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया और अपने पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा कराया और उसके बाद वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया।
बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया। आयकर विभाग ने चौहान के खिलाफ 2011 में जांच शुरू की थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए करीब छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की थी। यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक थी। सीबीआई भी वीरभद्र के खिलाफ जांच कर रही है।
बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया। आयकर विभाग ने चौहान के खिलाफ 2011 में जांच शुरू की थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए करीब छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की थी। यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक थी। सीबीआई भी वीरभद्र के खिलाफ जांच कर रही है।