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कचहरी का किस्साः जज साहब ही नहीं मान रहे कोर्ट का आदेश 

धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 11 Sep 2019 05:12 AM IST
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judge - फोटो : अमर उजाला
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अगर आम आदमी अदालत के आदेश को नहीं माने तो उसे जेल भेजा जा सकता है, लेकिन जब एक जज खुद अदालत का आदेश न माने तो इसे क्या कहेंगे। उत्तर प्रदेश में तैनात एक जज साहब अदालती आदेश के बाद भी पत्नी व नाबालिग बच्ची को गुजारा भत्ते व उसकी बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं। 
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खास बात है कि जज साहब की पत्नी भी जज हैं और उत्तर प्रदेश में ही तैनात हैं। दंपती के बीच कानूनी विवाद चल रहा है और दोनों 2013 से अलग है। दंपती के बीच तलाक का मुकदमा भी चल रहा है। 


रोहिणी जिला अदालत के समक्ष मेरठ में तैनात जज साहब ने 4.80 लाख की बकाया राशि में से केवल एक लाख रुपये अपनी पत्नी को दिए और अगस्त माह के अंत तक शेष राशि देने का आश्वासन दिया था। लेकिन इसके बाद अब तक शेष राशि नहीं दी गई है।

महिला जज की ओर से अधिवक्ता पूज्य कुमार सिंह व तरुण नारंग ने कोर्ट को बताया कि अदालती आदेश के बाद भी जज साहब अपनी पत्नी व बच्ची को गुजारा भत्ता की राशि नहीं दे रहे हैं। मामले की सुनवाई 25 सितंबर को होनी है। 

अदालत ने महिला जज की अर्जी पर सुनवाई के बाद जनवरी 2018 में उसे व उसकी नाबालिग बेटी के खर्च के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये व अर्जी दायर करने की तिथि से बकाया खर्च राशि देने का अंतरिम आदेश बरेली में तैनात जज को दिया था। पीड़िता ने 50 हजार रुपये गुजारा भत्ता दिलाने की मांग करते हुए जनवरी 2016 में अर्जी दायर की थी। 

अदालत के इस फैसले को जज साहब ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन न्यायमूर्ति संजीव सचेदवा ने 19 अप्रैल 2018 के अपने आदेश में उन्हें बकाया खर्च राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी जज साहब ने पत्नी को गुजारा भत्ते व बकाया राशि का भुगतान नहीं किया था। 

पेश मामले में रोहिणी निवासी पीड़ित महिला की शादी 23 नवंबर 2008 को गाजियाबाद निवासी युवक से हुई थी। शादी के बाद अक्तूबर 2010 में उन्हें एक बच्ची हुई थी। इसके बाद पहले पति व उसके बाद पत्नी भी यूपी में जज बन गए।  पीड़िता का आरोप है कि उसके पति व ससुराल वालों ने दहेज के लिए मारपीट व प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। 

जज साहब जब मुजफ्फरनगर में तैनात थे तो उन्होंने पत्नी को घर में घुसने से भी रोक दिया था और उसके बाद महिला जज अपने पिता के घर आ गई थी। ससुराल वालों ने उसे एलएलबी करने से भी रोका लेकिन उसने अपनी लगन से परीक्षा पास की और न्यायिक सेवा में चयनित हुई। उसने पति के खिलाफ 2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को शिकायत भेजी थी।
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