फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Journalist Soumya murder case Sentenced for the second time under MCOCA in Delhi

Soumya Murder Case: दिल्ली में मकोका के तहत दूसरी बार ठहराया दोषी, सबसे पहले जालसाजी के छह आरोपियों को हुई सजा

Thu, 19 Oct 2023 09:14 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 19 Oct 2023 09:14 AM IST
सार

अदालत ने पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। पांचवें आरोपी को मामले से जुड़े अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने उन्हें कड़े मकोका कानून के तहत भी दोषी ठहराया है।

विज्ञापन
Journalist Soumya murder case Sentenced for the second time under MCOCA in Delhi
सौम्या विश्वनाथन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अदालत ने पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। पांचवें आरोपी को मामले से जुड़े अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने उन्हें कड़े मकोका कानून के तहत भी दोषी ठहराया है।
विज्ञापन


साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने अपने फैसले में कहा कि पेश साक्ष्यों व गवाहों के बयानों पर यह साबित हुआ है कि आरोपी रवि कपूर, अमित शुक्ला, अजय कुमार और बलजीत मलिक ने विश्नाथन से लूटपाट करने के इरादे से हत्या की थी। उन्हें धारा 302 और 34 के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्हें मकोका के तहत भी दोषी ठहराया गया है।
विज्ञापन


अदालत ने पांचवें आरोपी अजय सेठी को आपत्तिजनक वाहन को अपने पास रखने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने फैसला सुनाया कि उसने संगठन को मदद भी की और संगठित अपराध से अर्जित संपत्ति पर भी कब्जा किया और उसे भी मकोका के तहत दोषी ठहराया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने सभी पांचो दोषियों की सजा निर्धारण पर सुनवाई 26 अक्तूबर तय की है। सितंबर 2008 में दिल्ली के वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग पर उनकी कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। विश्वनाथन एक निजी चैनल में काम करती थीं। 28 सितंबर, 2008 को काम से घर लौटते समय उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
 

कैसे हुआ खुलासा
बलजीत मलिक और दो अन्य रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने कहा कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या का मामला सुलझ गया था।

 

सौम्या विश्वनाथन की 30 सितंबर, 2008 को सुबह लगभग 3:30 बजे अपनी कार में काम से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसकी हत्या के पीछे लूटपाट का मकसद था। पांच लोगों- रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और मार्च 2009 से हिरासत में हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया था। मलिक और दो अन्य - रवि कपूर और अमित शुक्ला - को पहले 2009 में आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था।

 

पुलिस ने कहा कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या के मामले का खुलासा हुआ। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में जिगिशा घोष हत्या मामले में कपूर और शुक्ला को मौत की सजा और मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि, अगले वर्ष, उच्च न्यायालय ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और जिगिशा हत्या मामले में मलिक की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।

दिल्ली में मकोका के तहत दूसरी बार सजा
साकेत कोर्ट ने सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड के सभी पांचों दोषियों को महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका कानून) के तहत दोषी ठहराया है। दिल्ली में सबसे पहले मकोका के तहत जालसाजी के छह दोषियों को सजा सुनाई गई थी। पटियाला हाउस स्थित मकोका के विशेष न्यायाधीश राकेश स्याल ने छह लोगों को मकोका के तहत दोषी ठहराया है। इनमें एक को 12 व अन्य पांच दोषियों को दस-दस साल की सजा सुनाई गई है।

 

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मकोका को वर्ष 1999 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू किया गया था। इसे दिल्ली में वर्ष 2002 में अपनाया गया था। मकोका के तहत सबसे पहली सजा 2009 में दी गई जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मानव तस्करी और फर्जी पासपोर्ट मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था।

संगठित जुर्म करने वालों के लिए बनाया गया था मकोका
1999 में मुंबई राज्य सरकार ने बढ़ती माफिया शक्ति को नियंत्रित करने के लिए मकोका को लागू किया था। इस कानून का आधार यही बताया गया था कि मौजूदा आईपीसी की धाराएं राज्य में बढ़ते जुर्म को दबाने में सक्षम नहीं हैं और एक ऐसे कानून की आवश्यकता थी जो संगठित जुर्मों के खिलाफ पुलिस को शक्तिशाली बनाती है। इसके लिए पुलिस के पास अधिकार है कि वो आरोपी के पत्र, टेलीफोन और व्यक्तिगत रूप से किसी से मिलने पर भी रोक लगा दें।

किसी भी व्यक्ति पर मकोका लगने के बाद उसे जमानत मिलना नामुमकिन ही है। लेकिन यदि पुलिस 180 दिनों के अन्दर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है। किसी भी आरोपी पर मुकदमा तभी दाखिल किया जा सकता है जब ये साबित हो जाए कि वो बीते 10 सालों में कम से कम दो बार किसी तरह के संगठित जुर्म का हिस्सा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed