किन्नरों पर भी पड़ी नोटबंदी की मार, कहा- ‘जो नेग मिल जाता है, वे ही लेते हैं’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आठ नवंबर की आधी रात से नोटबंदी के आदेश के बाद आम हो या खास, सभी ऊहापोह की स्थिति में हैं। आम लोग रोज की जरूरतों के लिए नए नोट पाने के लिए कतार में खड़े होने से परेशान हैं। वहीं, खास लोग इसलिए परेशान हैं कि गलत तरीके से जुटाई गई अकूत संपत्ति को कैसे ऑन पेपर व्हाइट करें। इस फैसले से समाज में रहने वाले किन्नर भी प्रभावित हुए हैं।
रोज हजारों की बख्शीश लेने वाले किन्नरों को भी इन दिनों चंद रुपये से ही संतोष करना पड़ रहा है। इस परेशानी में भी किन्नर समाज फैसले को अच्छा मानता है। किन्नर गुरु गुड्डी कहती हैं कि जो हुआ अच्छा हुआ, हम इसलिए ज्यादा नहीं सोचते कि हमारे पास जो है, वह लोगों का दिया है।
चिंता वो करें जिन्होंने गलत तरीके से धन जमा किया है। बस इतना जरूर है कि नोटबंदी के बाद हमें मिलने वाली बख्शीस कम हो गई है, इसलिए नोटबंदी के फैसले के बाद 10 दिन तक हमने शहर में नेग नहीं मांगा। अब भी जो नेग मिल जाता है, वे ही लेते हैं।
परेशानी समझकर नहीं कर रहे जिद
किन्नर गुड्डी ने बताया कि वे लोगों की खुशियों में शामिल होने और दुआएं देने के लिए उनके घर पहुंचते हैं। बख्शीश के लिए हमारी जिद को गलत नहीं समझा जाता है। लोग खुशी से उन्हें बड़ी राशि भी दे देते हैं।
नोदबंदी के फैसले के बाद भी वे लोगों की खुशियों में शामिल होने जा रहे हैं, लेकिन हजार व पांच सौ के नोट बंद होने के कारण उन्हें मिलने वाली राशि में कमी आई है।
पहले हजार-दो हजार रुपये आसानी से मिल जाते थे। अब फुटकर के चक्कर में लोग हाथ सिकोड़ने लगे हैं। उनकी भी मजबूरी है। घंटों लाइन में लगने के बाद जिसे चंद रुपये मिले हों, वह पहले अपने घर के जरूरी काम निपटाएगा कि बख्शीस देगा।