जेएनयू हिंसाः लेफ्ट-राइट में उलझी नकाबपोश हमलावरों की पहचान, पुलिस की जांच पर उठे सवाल
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) हिंसा मामले में नकाबपोश हमलावरों की पहचान लेफ्ट-राइट के बीच उलझ कर रह गई है। पुलिस ने जिस आधार पर खुलासे का दावा किया उसमें कहीं से भी नकाबपोशों की पहचान नहीं हो सकी है।
पुलिस ने जिन नौ लोगों को हिंसा का जिम्मेदार बताया है, उनके वीडियो पांच जनवरी की रात से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। इसके बाद ही पुलिस के खुलासे पर हर ओर से उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं।
वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच लेफ्ट और राइट छात्र संगठन से जुड़े पूर्व छात्रों पर आकर रुक गई है। पुलिस आशंका जता रही है कि कैंपस में हमला करने वाले नकाबपोश यूनिवर्सिटी से जुड़े पूर्व छात्र भी हो सकते हैं। क्राइम ब्रांच विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम ऐसे ही छात्रों की जानकारी जुटा रही है।
जेएनयू के वाइस चांसलर (वीसी) ने स्वीकारा है कि कैंपस के हॉस्टल में अवैध तरीके से बाहरी लोग रह रहे थे। कैंपस में हुई हिंसा का खुलासा होने के बाद पुलिस ने किरकिरी से बचने के लिए बाहरी छात्रों की सर्विलांस की मदद से तलाश शुरू कर दी है। पुलिस कैंपस के हॉस्टलों में रह रहे छात्रों, वार्डन, सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन से जुड़े लोगों से इस बारे में पता करने में जुटी है।
सूत्रों की माने तो जांच में सामने आया है कि हिंसा के लिए जेएनयू के पूर्व छात्र जिम्मेदार थे, जो लंबे वक्त से हॉस्टल में रुके हुए थे। पुलिस उन हॉस्टल के छात्रों का भी ब्योरा जुटा रही है, जिनके कमरे पर पूर्व छात्र रुका करते थे। इसके बाद ही पुलिस नकाबपोश हमलावरों के पकड़े जाने का दावा कर रही है। हॉस्टल में रुके लोग लेफ्ट और राइट ग्रुप से भी जुड़े हो सकते हैं। उनके कैंपस में प्रवेश को लेकर कुछ सुरक्षा कर्मी भी संदेह के घेरे में हैं, जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है।
डीसीपी क्राइम ब्रांच जॉय टिर्की ने भी खुद इस बात को स्वीकारा था कि पिछले कई दिनों से कैंपस में जांच के बाद ही पुलिस रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ नहीं हो पाई है। ऐसे में किसी बाहरी का अंदर आकर हमला करना कैसे मुमकिन हो सकता है। जबकि हिंसा वाले दिन हमलावर हॉस्टल के बारे में पूरी तरह वाकिफ थे।
बयान दर्ज कराने से बच रहे घायल छात्र
सूत्रों की माने तो अभी नकाबपोश हमलावरों की पहचान करना तो दूर पुलिस घायलों के बयान तक नहीं ले सकी है। वे पुलिस के बुलाने पर भी बयान देने के लिए नहीं आ रहे। वहीं हिंसा में घायल हुए कुछ छात्रों का कहना है कि वह जेएनयू में पढ़ाई के लिए आएं थे ना कि किसी पुलिस पचड़े में पड़ने के लिए। इसलिए ही छात्र बयान देने से अब पीछे हट रहे हैं।
लेफ्ट संगठन से जुड़े छात्रों ने पुलिस पर लगाया पक्षपात का आरोप
लेफ्ट संगठन से जुड़े छात्रों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि इस हमले के पीछे (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) एबीवीपी के छात्रों का हाथ है। ऐसे में पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर कई वायरल वीडियो में एबीवीपी से जुड़े लोग साफ नजर भी आ रहे हैं, लेकिन पुलिस उसे दरकिनार कर रही है।