{"_id":"68de9b4c5b03215e480826b2","slug":"jnu-put-an-end-to-anti-national-ideas-through-ravana-dahan-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-107194-2025-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: जेएनयू ने रावण दहन के जरिए राष्ट्रविरोधी विचारों का किया अंत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: जेएनयू ने रावण दहन के जरिए राष्ट्रविरोधी विचारों का किया अंत
विज्ञापन
- रावण के पुतले को नक्सलवाद, वामपंथी विचारधारा, माओवादी हिंसा और राष्ट्रविरोधी ताकतों के प्रतीक के रूप में जलाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विजय दशमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के साबरमती ग्राउंड में जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के संयुक्त सचिव वैभव मीणा के आह्वान पर प्रतीकात्मक रावण दहन आयोजित किया गया। इसमें रावण के पुतले को नक्सलवाद, वामपंथी विचारधारा, माओवादी हिंसा और राष्ट्रविरोधी ताकतों के प्रतीक के रूप में जलाया गया। जेएनयूएसयू ने उमर खालिद, शरजील इमाम, अफजल गुरु, चारु मजुमदार और कानू सान्याल जैसे व्यक्तियों को राष्ट्रविरोधी तत्वों के रूप में चिह्नित करते हुए उनकी विचारधारा के अंत का संदेश दिया। इस दौरान वैभव मीणा ने कहा कि जेएनयू राष्ट्रविरोधी और वामपंथी मानसिकता के महिमामंडन का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने वाली धरती बनेगी। उन्होंने इसे उन ताकतों के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया, जिन्होंने कभी परिसर में श्री राम की प्रतिमा का अपमान किया या टुकड़े-टुकड़े गैंग के नारे लगाए।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विजय दशमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के साबरमती ग्राउंड में जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के संयुक्त सचिव वैभव मीणा के आह्वान पर प्रतीकात्मक रावण दहन आयोजित किया गया। इसमें रावण के पुतले को नक्सलवाद, वामपंथी विचारधारा, माओवादी हिंसा और राष्ट्रविरोधी ताकतों के प्रतीक के रूप में जलाया गया। जेएनयूएसयू ने उमर खालिद, शरजील इमाम, अफजल गुरु, चारु मजुमदार और कानू सान्याल जैसे व्यक्तियों को राष्ट्रविरोधी तत्वों के रूप में चिह्नित करते हुए उनकी विचारधारा के अंत का संदेश दिया। इस दौरान वैभव मीणा ने कहा कि जेएनयू राष्ट्रविरोधी और वामपंथी मानसिकता के महिमामंडन का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने वाली धरती बनेगी। उन्होंने इसे उन ताकतों के खिलाफ एक मजबूत कदम बताया, जिन्होंने कभी परिसर में श्री राम की प्रतिमा का अपमान किया या टुकड़े-टुकड़े गैंग के नारे लगाए।