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सीबीआई को दो साल बाद भी नहीं मिला जेएनयू छात्र नजीब, अदालत ने दी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की इजाजत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:17 AM IST
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दो साल से जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में हाईकोर्ट ने आज(8 अक्तूबर) फैसला सुनाते हुए सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि नजीब की मां निचली अदालत में अपनी बात रख सकती हैं, जहां रिपोर्ट दायर की गई है।
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अदालत ने कहा यदि नजीब अहमद की मां स्थिति रिपोर्ट चाहती हैं तो उन्हें निचली अदालत जाना होगा। पीएचडी का छात्र नजीब अहमद अक्तूबर 2016 से लापता है। उसकी मां ने प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उसे तलाश कराने की गुहार लगाई थी।
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पहले इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस व कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर चुकी है। सीबीआई इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की बात कह चुकी है। जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने आज नजीब की मां फातिमा नफीस की याचिका पर फैसला सुनाया। खंडपीठ ने चार सितंबर को सीबीआई व पीड़ित पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले की जांच हाईकोर्ट ने 16 मई 2017 को सीबीआई को सौंपी थी।
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क्या है मामला
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य छात्रों के साथ हुए झगड़े के अगले दिन 15 अक्तूबर 2016 को नजीब गायब हो गया था। दूसरी ओर याची के वकील कोलिन गोंस्लविस ने कोर्ट के समक्ष कहा कि यह एक राजनीतिक मामला है और सीबीआई राजनीतिक दबाव के चलते इस केस को नहीं सुलझाई।
फातिमा नफीस ने 25 नवंबर 2016 को याचिका दायर कर एसआईटी बनाने और उसके बेटे के तलाश करने की मांग की थी। सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में उसे निचली अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी है, लेकिन उससे पहले वह जानकारी हाईकोर्ट के समक्ष लाना चाहती थी।
फातिमा नफीस ने 25 नवंबर 2016 को याचिका दायर कर एसआईटी बनाने और उसके बेटे के तलाश करने की मांग की थी। सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में उसे निचली अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी है, लेकिन उससे पहले वह जानकारी हाईकोर्ट के समक्ष लाना चाहती थी।