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जेएनयू नारेबाजी विवाद: सरकार ने की थी तीन चैनलों के खिलाफ शिकायत, फैसला सुरक्षित 

Thu, 20 Oct 2016 09:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 20 Oct 2016 09:38 AM IST
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jnu case against channel action in delhi
- फोटो : व‌िवेक न‌िगम

जेएनयू नारेबाजी विवाद मामले में प्रस्तावित आरोपी समाचार चैनल के संपादक की अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया। चैनल ने कहा कि इस मामले में वह प्रस्तावित आरोपी है इसलिये इस मामले में उसे समन जारी होने से पहले भी अपना पक्ष रखने का पक्ष है। चैनल के संपादक ने अर्जी दायर कर सरकार की शिकायत पर सुनवाई रोकने की मांग की थी।

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बता दें कि दिल्ली सरकार ने तीन समाचार चैनलों पर छेड़छाड़ वाली वीडियो चलाकर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। सरकार ने इन चैनलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश 26 मई को दिया था।
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पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम सुमित दास के समक्ष समाचार चैनल की ओर से अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने बहस करते हुये कहा कि इस मामले में उसे अभी तक समन जारी नहीं हुआ है लेकिन इसके बावजूद उसे अपना पक्ष रखने का अधिकार है क्योंकि इस मामले में उसे भी एक प्रस्तावित आरोपी बनाया गया है।
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गौरतलब है कि समाचार चैनल के संपादक ने अपनी अर्जी में कहा था कि इस मामले में थाना वसंत कुंज नार्थ में 11 फरवरी को एफआईआर दर्ज की गई थी। सरकार ने जिस वीडियो को डॉक्टर्ड बताया है वह इस केस में जांच का आधार है।

कोर्ट के समक्ष अधिवक्ता अग्रवाल ने अपनी दलीलें रखते हुये कहा कि जिस वीडियो पर दिल्ली सरकार ने सवाल उठाया है उस वीडियो को सरकार की फोरेंसिक लैब ने सही बताया है। जबकि दिल्ली सरकार इस वीडियो को गलत साबित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह शिकायत सीएम कार्यालय की ओर से दी गई है। जबकि उसे यह शिकायत देने का अधिकार नहीं है। चूंकि वह दिल्ली सरकार नहीं है।

मामले में शिकायतकर्ता की ओर से बहस करते हुये वरिष्ठï अधिवक्ता एन. हरीहरन ने कहा कि मौजूदा शिकायत और पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर की विषय वस्तु पूरी तरह अलग है। यह शिकायत चैनल द्वारा उस घटना का समाचार दिखाने से संबंधित नहीं है बल्कि उस घटना की वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर दोबारा दिखाने से संबंधित है जिससे देश का माहौल खराब हो।

पुलिस की एफआईआर में भी चैनल को आरोपी नहीं बनाया गया है और इस शिकायत के संदर्भ में उसे अभी तक समन जारी नहीं हुआ है। इन तथ्यों के मद्देनजर चैनल के संपादक को अभी अर्जी दायर करने या इस मामले में इस समय अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं है।


दिल्ली सरकार ने तीन चैनलों व उनके संपादकों के खिलाफ शिकायत दायर कर उन पर डॉक्टर्ड वीडियो चलाकर अशांति फैलाने और जनता को भड़काने का आरोप लगाते हुये मुकदमा चलाने की मांग की है।

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