केजरीवाल के मंत्री ने कहा, यह रोल नंबर मेरा नहीं
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दिल्ली के कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर कानूनी उलझन में फंस गए हैं। स्नातक के बाद एलएलबी की डिग्री पर खड़े हुए सवाल के बाद आम आदमी पार्टी को घेरने में विरोधी पार्टिंया जुट गई हैं।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्री जितेन्द्र तोमर को बुलाकर मामले पर सफाई मांगी। बातते हैं कि मामला समझने के बाद हालात को संभालने केलिए मंत्री को मीडिया से बातचीत के लिए भी कहा गया है।
मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर मंगलवार दोपहर बाद मीडिया से मुखातिब हुए और याचिका झूठा करार दिया है। तोमर ने कहा है कि जिस रोल नंबर का हवाला आरटीआई में दिया गया है, वह मेरा नहीं है।
तोमर ने कहा है कि मुझे मुख्यमंत्री ने तलब नहीं किया बल्कि मैं रोजाना अरविंद केजरीवाल से कई बार मिलता हूं। इससे पूर्व कानून मंत्री ने मीडिया को गैर आधिकारिक तरीके से डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद, यूपी की चिट्ठी, आरटीआई की प्रति भी दिखाई।
कोर्ट में नहीं जमा हुआ शपथपत्र
कानून मंत्री ने कहा है कि जो कुछ हो रहा है ये राजनीतिक साजिश है जो भाजपा रच रही है। जो 22,312 वोट से हारे हैं, वह आम आदमी पार्टी को घेरने की तरीके की तलाश में हैं।
गलत आरटीआई की जानकारी पर डाली गई याचिका झूठी है। कोर्ट में रिकार्ड नहीं है और भाजपा के लोग उस पर बयान दे रहे हैं। याचिका तो किसी के खिलाफ भी, कितनी भी डाली जा सकती है। विश्वविद्यालय के जिस शपथपत्र की बात की जा रही है वह कोर्ट में जमा ही नहीं हुआ।
वहीं दूसरी तरफ प्रदेश युवक कांग्रेस ने कानून मंत्री को बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर विरोध प्रदर्शन किया।
तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को माफी मांगने के साथ ही तोमर को मंत्री पद से हटाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस 30 अप्रैल को दिल्ली सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करेगी।
याचिका कोई कानून नहीं जो इस्तीफा दूं
किसी के खिलाफ डाली गई याचिका कोई कानून नहीं है। किसी के खिलाफ भी कितनी भी डाली जा सकती है। फिर इस्तीफे की कोई बात कहां से आ गई। मेरे खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज हुआ है, न ही कोई जांच हुई। अदालत ने मेरे खिलाफ कोई आदेश भी नहीं दिया, न ही कोई टिप्पणी की है। कोर्ट जब पूरा रिकार्ड मंगाएगी तो सबकुछ सामने आ जाएगा। -जितेन्द्र तोमर, कानून मंत्री।
सबकुछ जानते हुए जितेन्द्र तोमर को मंत्री बनाने के मामले में अरविंद केजरीवाल को माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मामले का पता लगते ही कानून मंत्री को बर्खास्त कर देना चाहिए था। बड़ी-बड़ी बात करने वाले केजरीवाल का चुप रहना शक पैदा करता है। झूठ का पर्दाफाश होने पर जनता तुरंत कार्रवाई चाहती है। -अजय माकन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष।