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Delhi NCR News: ठहराव में छिपी मन की हलचल को कैनवास पर उतारेंगी जीशा
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-आईफैक्स आर्ट गैलरी में 23 अक्तूबर से लगेगी इनर लैंडस्केप्स प्रदर्शनी, रोजमर्रा की जिंदगी के अनदेखे भावों को दिखाएंगी पेंटिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रोजमर्रा की भागदौड़ में कई बार इंसान ठहरता तो है, लेकिन उसके भीतर विचारों और भावनाओं की हलचल चलती रहती है। मन की इसी अनकही दुनिया को युवा कलाकार जीशा एलिजाबेथ के. अपनी पेंटिंग के जरिए सामने लाने की कोशिश करेंगी। उनकी एकल कला प्रदर्शनी इनर लैंडस्केप्स पोस्चर्स ऑफ द माइंड 23 से 29 अक्तूबर तक आईफैक्स आर्ट गैलरी, रफी मार्ग में आयोजित होगी। जीशा के मुताबिक, उनकी यह प्रदर्शनी रोजमर्रा की जिंदगी के उन पहलुओं पर केंद्रित है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसमें ठहराव को खालीपन या कमी के रूप में नहीं, बल्कि खुद को समझने और अपने भीतर झांकने के अवसर के रूप में पेश किया गया है। कलाकार का प्रयास उन सूक्ष्म भावनात्मक स्थितियों को दृश्य रूप देना है, जिन्हें लोग अक्सर शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते।
तकनीक, साहित्य और कला का मेल
जीशा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और अंग्रेजी साहित्य से जुड़ी है। उन्होंने लंदन से ग्राफिक डिजाइन में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। उनके काम में तकनीकी समझ, साहित्यिक संवेदनशीलता और दृश्य कहानी कहने की कला का मेल दिखाई देता है। उनकी कलाकृतियां इससे पहले सिंगापुर के अफोर्डेबल आर्ट फेयर और एस्थेलेटिक आर्ट गैलरी के साथ-साथ मुंबई के द हाट ऑफ आर्ट में प्रदर्शित हो चुकी हैं। नवंबर 2022 में उनकी पेंटिंग सिंगापुर की नेशनल लाइब्रेरी में भी प्रदर्शित की गई थीं। उनकी कलाकृतियां भारत, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और लंदन के निजी और कॉरपोरेट संग्रहों में शामिल हैं। जीशा का कहना है कि वह मन की उन आंतरिक अवस्थाओं को सामने लाना चाहती हैं, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। उनकी यह प्रदर्शनी दर्शकों को रोजमर्रा के अनुभवों और अपने भीतर की दुनिया को एक अलग नजरिए से देखने का अवसर देगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रोजमर्रा की भागदौड़ में कई बार इंसान ठहरता तो है, लेकिन उसके भीतर विचारों और भावनाओं की हलचल चलती रहती है। मन की इसी अनकही दुनिया को युवा कलाकार जीशा एलिजाबेथ के. अपनी पेंटिंग के जरिए सामने लाने की कोशिश करेंगी। उनकी एकल कला प्रदर्शनी इनर लैंडस्केप्स पोस्चर्स ऑफ द माइंड 23 से 29 अक्तूबर तक आईफैक्स आर्ट गैलरी, रफी मार्ग में आयोजित होगी। जीशा के मुताबिक, उनकी यह प्रदर्शनी रोजमर्रा की जिंदगी के उन पहलुओं पर केंद्रित है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसमें ठहराव को खालीपन या कमी के रूप में नहीं, बल्कि खुद को समझने और अपने भीतर झांकने के अवसर के रूप में पेश किया गया है। कलाकार का प्रयास उन सूक्ष्म भावनात्मक स्थितियों को दृश्य रूप देना है, जिन्हें लोग अक्सर शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते।
तकनीक, साहित्य और कला का मेल
जीशा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और अंग्रेजी साहित्य से जुड़ी है। उन्होंने लंदन से ग्राफिक डिजाइन में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। उनके काम में तकनीकी समझ, साहित्यिक संवेदनशीलता और दृश्य कहानी कहने की कला का मेल दिखाई देता है। उनकी कलाकृतियां इससे पहले सिंगापुर के अफोर्डेबल आर्ट फेयर और एस्थेलेटिक आर्ट गैलरी के साथ-साथ मुंबई के द हाट ऑफ आर्ट में प्रदर्शित हो चुकी हैं। नवंबर 2022 में उनकी पेंटिंग सिंगापुर की नेशनल लाइब्रेरी में भी प्रदर्शित की गई थीं। उनकी कलाकृतियां भारत, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और लंदन के निजी और कॉरपोरेट संग्रहों में शामिल हैं। जीशा का कहना है कि वह मन की उन आंतरिक अवस्थाओं को सामने लाना चाहती हैं, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। उनकी यह प्रदर्शनी दर्शकों को रोजमर्रा के अनुभवों और अपने भीतर की दुनिया को एक अलग नजरिए से देखने का अवसर देगी।
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