वाह रे UP पुलिस! 139 किमी तक 5 हाईवे के लिए सिर्फ 3 पेट्रोलिंग जीप
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जिले में 139 किमी लंबे पांच प्रमुख हाईवे की सुरक्षा के लिए पुलिस की मात्र तीन पेट्रोलिंग जीप हैं। इनमें से एक जीप रबूपुरा थाने में और दो जीप जेवर थाने में हैं। जेवर थाने की दोनों पेट्रोलिंग जीप यमुना एक्सप्रेस-वे पर तैनात रहती हैं। शेष जगहों पर अस्थायी रूप से पीसीआर को तैनात किया जाता है। जिस जेवर-बुलंदशहर हाईवे पर बुधवार देर रात बदमाशों ने हैवानियत की, उस पर पेट्रोलिंग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
बुधवार रात भी गौतमबुद्धनगर अंतर्गत मौजूद जेवर-बुलंदशहर हाईवे पर पुलिस की कोई पेट्रोलिंग गाड़ी मौजूद नहीं थी। यही वजह है कि पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने में आधा घंटे का वक्त लगा। घटनास्थल से जेवर थाने की रन्हेरा पुलिस चौकी महज दो किमी दूर है। घटनास्थल से जेवर थाना छह किमी और यमुना एक्सप्रेस-वे केवल पांच किमी दूर है। मौके पर पहुंचने के बाद भी पुलिस को खेतों में बंधक बनाए गए पीड़ित परिवार तक पहुंचने में करीब एक घंटे का वक्त और लग गया था।
यमुना एक्सप्रेस-वे आसपास बदमाशों द्वारा की गई इस तरह की ये पहली घटना नहीं है। इससे पहले एक नवंबर 2016 को छह बदमाशों ने रबूपुरा थाना अंतर्गत हाईवे किनारे मौजूद ईंट-भट्टे पर काम करने वाली तीन महिलाओं को बंधक बनाकर उनके साथ गैंग रेप और लूटपाट की थी। 29 जुलाई 2016 को बुलंदशहर में एनएच-91 पर 12 बदमाशों ने खोड़ा के परिवार को बंधक बना लूटपाट की और 35 वर्षीय मां व उसकी 14 वर्षीय बेटी संग सामूहिक दुष्कर्म किया था।
21 जनवरी 2017 की रात अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे खे पास छह बदमाशों ने हिमाचल के पूर्व डीआईजी के फार्म हाउस पर दो महिलाओं को बंधक बना प्रताड़ित किया था। इसके बाद इन्हीं बदमाशों ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से लखनऊ जा रही बस को रोक सवारियों से लूटपाट की और विरोध करने पर दो को गोली मार दी थी। इसके अलावा जिले के हाईवे और प्रमुख मार्ग पर बदमाश आए दिन खुलेआम वारदात कर निकल जाते हैं। बावजूद पुलिस हाईवे की सुरक्षा पुख्ता करने कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
29 जुलाई 2016 को बुलंदशहर में मां-बेटी संग हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद यूपी पुलिस ने प्रदेश के चार नेशनल हाईवे को सबसे खतरनाक घोषित किया था। इसमें एनएच-2 (कानपुर से चंदौली), एनएच-24 (गाजियाबाद से लखनऊ), एनएच-91 (गाजियाबाद से कानपुर) और एनएच-93 (आगरा से मुरादाबाद) हाईवे शामिल हैं। इनमें से दो हाईवे एनएच-91 और एनएच-24 गौतमबुद्धनगर जिले से होकर गुजरते हैं। सपा सरकार ने इन पर सुरक्षा के विशेष बंदोबश्त करने का वादा किया था, जो अधूरा रह गया।
गौतमबुद्धनगर में महत्वपूर्ण हाईवे
जेवर-बुलंदशहर हाईवे : लगभग 25 किमी
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे : 23 किमी
यमुना एक्सप्रेस-वे : तकरीबन 50 किमी
एनएच-91 (जीटी रोड) : 36 किमी
एनएच-24 : 05 किमी
जिले के अंदरूनी प्रमुख मार्ग
नोएडा-कासना 130 मीटर मार्ग : 28 किमी
नोएडा-सूरजपुर-दादरी को जोड़ने वाली डीएससी रोड : 40 किमी
सूरजपुर को दनकौर से जोड़ने वाला मार्ग : 18 किमी
जिले में पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति
पुलिस व प्राधिकरण की पीसीआर : 85
पीआरवी-100 : 43
लैपर्ड बाइक : 217
पीसीआर व पीआरवी पर लगने वाली ड्यूटी : चालक व दो सिपाही
पीसीआर व पीआरवी पर ड्यटी का मानक : एक चालक, एक एसआई, चार सिपाही
बुलंदशहर गैंग रेप के बाद हाईवे सुरक्षा के दावे
- तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर यूपी पुलिस ने अगस्त-2016 में हाईवे सिक्योरिटी का ब्लू प्रिंट तैयार किया था।
- पूरे प्रदेश में हाईवे सुरक्षा के लिए संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरा लगा पुलिस को तैनात किया जाना था।
- तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद ने दावा किया था कि हाईवे पेट्रोलिंग की गाड़ियां अत्याधुनिक कैमरों से लैस होंगी। कैमरों की निगरानी में पुलिस चेकिंग करेगी।
- तत्कालीन आईजी लॉ एंड ऑर्डर हरिराम शर्मा ने दावा किया था कि हाईवे पर संवेदनशील स्थान चिन्हित किए जा रहे। यहां जल्द अस्थाई पुलिस चेकपोस्ट लगेंगे। हाईवे वाले थानों में खाली पद जल्द भरे जाएंगे।
- पूरे प्रदेश के हाईवे सुरक्षा की जिम्मेदारी एक आईजी और एक डीआईजी को सौंपी जानी थी।
- थाने में दो गाड़ी होने पर एक को हाईवे पर तैनात करने के आदेश डीजीपी ने दिए थे।
- सभी टोल टैक्स पर संदिग्धों पर नजर रखने के लिए 24 घंटे एक उपनिरीक्षक के नेतृत्व में पुलिस टीम तैनात की जानी थी।
- जिलाधिकारी व एसएसपी को उनकेजिले के हाईवे पर लाइट आदि की व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए गए थे।
-प्रदेश के चार सबसे खतरनाक हाईवे एनएच-2, एनएच-24, एनएच-91 व एनएच-93 की विशेष सुरक्षा का दावा किया गया था।
-नवंबर-2014 में भी शासन ने 1100 पुलिसकर्मियों को प्रदेश के कुल 850 किमी लंबे हाईवे की सुरक्षा सौंपने की पहल की थी। इसके तहत प्रत्येक 40 मिकी पर पुलिस चेक पोस्ट बननी थी। वर्ष 2015 तक योजना को मूर्त रूप लेना था।