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16 साल तक फाइलों में दबा रहा जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव

Sat, 24 Jun 2017 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 24 Jun 2017 10:35 PM IST
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jewar airport file is pending till 16 years
Jewar

जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए वर्ष 2001 में तत्कालीन राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली यूपी में भाजपा सरकार के समय प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन जब प्रदेश में 2007 में मायावती की सरकार बनी तो एयरपोर्ट के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे पर काम शुरू हो गया। बसपा ने यमुना एक्सप्रेसवे को 2012 में बनाकर तैयार कर दिया था, लेकिन केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने बेहतर तालमेल नहीं होने से एयरपोर्ट प्रोजेक्ट खटाई भी पड़ गया। 

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2003 में एक बार फिर भाजपा-बसपा सरकार में जेवर एयरपोर्ट का मुद्दा आगे बढ़ा और केंद्र तक एयरपोर्ट के लिए पेशकश की गई थी। हालांकि, खिचड़ी सरकार में एक बार फिर दम तोड़ दिया और मामला फिर अधर में लटक गया। वर्ष 2007-12 में मायावती सरकार के कार्यकाल में यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण ने इसके लिए पांच हजार हेक्टेयर भूमि को आरक्षित कर दिया था। इसी प्रोजेक्ट को ध्यान में रखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे का भी निर्माण किया गया। हालांकि, इस बार वर्ष 2008 में जेवर में अंतरराष्ट्रीय कार्गो एयरपोर्ट के लिए केंद्र सरकार को आवेदन किया गया था। इस दौरान सर्वे कराकर पांच हजार हेक्टेयर भूमि आरक्षित कराई गई थी, लेकिन केंद्र में कांग्रेस सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ने दिया। 
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वहीं, वर्ष 2012 में सपा सरकार आने पर रही सही कसर निकाली गई और यह योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। वर्ष 2015 में स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री बनने पर एक बार फिर से एयरपोर्ट के लिए प्रयास तेज हो गए, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने साफ कर दिया था कि इस तरह का प्रोजेक्ट है ही नहीं। 2015 में ही दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे फेयर में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेवर सहित प्रदेश के तीन शहरों में एयरपोर्ट बनाने की मांग केंद्र सरकार से करने की बात रखी। 
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तत्कालीन सीएम की तरफ से प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भी गया था।  इसके बाद विधान सभा चुनावों में प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई। केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा स्वयं सीएम आदित्यनाथ योगी से मिले थे। सीएम ने जेवर एयरपोर्ट के लिए घोषणा भी कर दी थी पर उड्डयन मंत्री ने फिर प्रोजेक्ट को नकार दिया। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी राज्य सरकार के सामने मांग रखी। दबाव पड़ने पर  दोबारा से ओएलएस सर्वे कराया गया। जिसमें कोई कमी न मिलने के बाद केंद्र सरकार से भी इस प्रस्ताव को बनाने के लिए हरी झंडी मिल गई। 

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