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Delhi NCR News: जेपी इंफ्राटेक के पूर्व एमडी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
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पटियाला हाउस कोर्ट में हुई सुनवाई, 13 नवंबर को किया गया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को जेपी इंफ्राटेक के पूर्व महाप्रबंधक और सीईओ मनोज गौड़ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौड़ को 13 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था। वह पांच दिन की ईडी हिरासत में थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा की कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर न्यायिक हिरासत की मांग को स्वीकार किया। ईडी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला हजारों घर खरीदारों से वसूले गए लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।
आरोप है कि जेपी समूह ने यह धनराशि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने के बजाय अन्य संस्थाओं को दी और धनराशि का दुरुपयोग किया। ईडी का दावा है कि जांच में मनोज गौड़ की केंद्रीय भूमिका सामने आई है।
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दूसरी ओर, गौड़ के अधिवक्ता ने ईडी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि ईसीआईआर 2018 में दर्ज हुआ था, जबकि गिरफ्तारी सात साल बाद की गई है। निर्माण कार्य पर एनजीटी की रोक लगी हुई थी, जिससे प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सके। आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और 10 हजार दस्तावेज जमा करा चुका है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जब कंपनी ही भंग हो चुकी है, तो व्यक्ति को हिरासत में भेजने की क्या जरूरत है। उन्होंने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को जेपी इंफ्राटेक के पूर्व महाप्रबंधक और सीईओ मनोज गौड़ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौड़ को 13 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था। वह पांच दिन की ईडी हिरासत में थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा की कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर न्यायिक हिरासत की मांग को स्वीकार किया। ईडी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला हजारों घर खरीदारों से वसूले गए लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।
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आरोप है कि जेपी समूह ने यह धनराशि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने के बजाय अन्य संस्थाओं को दी और धनराशि का दुरुपयोग किया। ईडी का दावा है कि जांच में मनोज गौड़ की केंद्रीय भूमिका सामने आई है।
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दूसरी ओर, गौड़ के अधिवक्ता ने ईडी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि ईसीआईआर 2018 में दर्ज हुआ था, जबकि गिरफ्तारी सात साल बाद की गई है। निर्माण कार्य पर एनजीटी की रोक लगी हुई थी, जिससे प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सके। आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और 10 हजार दस्तावेज जमा करा चुका है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जब कंपनी ही भंग हो चुकी है, तो व्यक्ति को हिरासत में भेजने की क्या जरूरत है। उन्होंने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया।