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जाट आंदोलन प्रशासन सतर्क, सील कर दी जाएंगी सीमाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 04 Jun 2016 09:20 AM IST
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जाट आरक्षण
- फोटो : Getty
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प्रदेश में 5 जून से जाट आरक्षण के लिए आंदोलन के ऐलान के बाद जिला प्रशासन सतर्क है। उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि अभी तक किसी भी जाट समुदाय के संगठन ने आंदोलन को लेकर सूचना नहीं दी है।
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फिर भी प्रशासन और पुलिस दोनों ने इससे निपटने के लिए रणनीति बना ली है। उपायुक्त ने कहा कि यदि प्रदेश के दूसरे जिलों में भी आंदोलन होता है, तो ऐहतियात के तौर पर झज्जर व कापसहेड़ा (दिल्ली) के साथ लगते गुड़गांव की सीमाओं को सील कर दिया जाएगा, ताकि उपद्रव फैलाने वाले शरारती तत्व यहां प्रवेश न कर पाएं।
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प्रदेश में पहले से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू है, ऐसे में उपद्रव करने वालों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। एक सवाल के जवाब में उपायुक्त ने कहा कि सोशल मीडिया पर भेजे जा रहे संदेशों पर नजर रखी जा रही है और भड़काऊ संदेश भेजने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त कार्यालय में बना साइबर सेल इन संदेशों पर निगरानी रखे हुए है।
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आंदोलन को देखते लगाई धारा-144
आंदोलन पुन: शुरू होने की आशंका के मद्देनजर जिलाधीश टीएल सत्यप्रकाश ने दंड प्रक्रिया अधिनियम की धारा 144 के तहत निषेद्याज्ञा लागू की है। इन आदेशों के तहत जिले में सभी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधियों, सड़क, रास्ते, रेलवे लाइन, जलापूर्ति की नहर, बिजली के पावर हाउस आदि को आंदोलनकारियों द्वारा रोके जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इसके अलावा 5 या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने और घातक हथियार लेकर चलने पर पाबंदी लगा दी गई है। ये आदेश शुक्रवार से लागू कर दिए गए हैं और अगले 60 दिन तक प्रभावी रहेंगे। आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बलवाइयों की संपत्ति का लिया जा रहा ब्योरा
उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने कहा कि फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में जिन व्यक्तियों की भूमिका थी, उसमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इसके लिए उनकी चल और अचल संपत्ति का ब्योरा लिया जा रहा है। राज्य सरकार शीघ्र ही क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति करके नुकसान की भरपाई व जिम्मेदारी तय करने जा रही है। जिम्मेदारी तय करने के लिए विभिन्न सरकारी रिपोर्टों व समाचार पत्रों में जारी बयानों तथा सार्वजनिक मंचों से दिए गए भाषणों की क्लिपिंग को खंगाला जा रहा है।