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जंतर-मंतर भड़काऊ नारेबाजी केस: अश्विनी उपाध्याय की जमानत याचिका पर अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला
Wed, 11 Aug 2021 02:26 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 11 Aug 2021 02:26 PM IST
सार
जंतर मंतर पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करने के मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार दिन में अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जंतर मंतर पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करने के मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार दिन में अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत उनकी जमानत याचिका पर शाम 4.00 बजे तक फैसला सुनाएगी।
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गौरतलब है कि अदालत ने मंगलवार को मामले में लिप्त दो आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। वहीं अदालत ने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय सहित चार आरोपियों को 2 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने आरोपी अश्विनी उपाध्याय की जमानत पर सुनवाई बुधवार को तय करते हुए जांच अधिकारी को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।
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दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सभी गिरफ्तार 6 आरोपियों को पटियाला हाउस अदालत की महानगर दंडाधिकारी तानवी खुराना के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया था। हालांकि, अदालत में पेश करने के ध्यानार्थ भाजपा नेता कपिल मिश्रा सहित काफी लोग अदालत परिसर में पहुंच गए थे।
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सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी और सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि इन सभी आरोपियों ने जंतर मंतर पर भारी भीड़ के दौरान एक समुदाय विशेष के खिलाफ काफी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और मामला अत्यंत संवेदनशील है।
उन्होंने अदालत से आरोपी दीपक सिंह हिंदू और विनीत बाजपेयी को 3 दिन का रिमांड देने का आग्रह करते हुए बताया कि इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान आपत्तिजनक नारेबाजी करने के मामले में लिप्त अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है। मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में इनका रिमांड 3 दिन के लिए मंजूर किया जाए।
सरकारी वकील ने यह भी बताया कि वर्तमान में संसद चल रही है और स्वतंत्रता दिवस नजदीक है। इसके अलावा महामारी के चलते किसी को भी धरने प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद यह लोग वहां एकत्रित हुए और समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण देकर माहौल खराब करने का प्रयास किया।
हालांकि, बचाव पक्ष ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों से कुछ बरामद नहीं करना है लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पूछताछ के लिए एक दिन का रिमांड काफी है।
वहीं दूसरी तरफ अश्विनी उपाध्याय के वकीलों ने जमानत अर्जी पेश करते हुए अदालत को बताया कि जब यह नारेबाजी और भाषण हुआ उस समय उनका मुवक्किल मौके पर उपस्थित नहीं था। वे दोपहर करीब 12:15 बजे मौके से जा चुके थे। उन्हें आपत्तिजनक भाषण और टिप्पणियों की कोई जानकारी नहीं है। उनकी गिरफ्तारी गैर कानूनी है और वह किसी भी हालत में इस प्रकार की भाषणबाजी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
वहीं जांच अधिकारी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यदि जमानत मंजूर की गई तो वे साक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें विस्तृत जवाब देने के लिए समय प्रदान किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों के सुनने के बाद कहा कि वर्तमान में रात्रि के 8:50 हो चुके हैं।
ऐसे में वह सभी आरोपियों को 2 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश देती हैं साथ ही उन्होंने अश्वनी उपाध्याय की जमानत पर सुनवाई बुधवार को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष करने का निर्देश देते हुए जांच अधिकारी को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है साथ ही उन्होंने सभी चार आरोपियों को 2 दिन बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने को कहा है