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...तो इसलिए जन लोकपाल बिल लाने से बच रहे केजरीवाल

Mon, 28 Sep 2015 07:55 PM IST
Updated Mon, 28 Sep 2015 07:55 PM IST
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jan lokayukt bill would be introduced soon in delhi assembly

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली का जनलोकायुक्त बिल लगभग तैयार है। विधानसभा के आगामी सत्र में इसे पेश करने में सक्षम हैं।

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हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि विस में बिल पेश करने के पहले उपराज्यपाल या केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजना जरूरी है या नहीं, इस पर कानूनी राय ली जा रही है।
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केन्द्र सरकार से लड़ाई के बीच सरकार जनलोकपाल कानून बनाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं चाहती। अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल बिल पेश नहीं कर पाने के कारण 14 फरवरी, 2014 को इस्तीफा दिया था।
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उपराज्यपाल या केन्द्र सरकार से बिल की स्वीकृति लिए बिना आम आदमी पार्टी की सरकार ने विधानसभा में बिल पेश करने की कोशिश की थी। जिसकी वजह से सत्ता में साथ दे रही कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा ने खुलकर विरोध किया था।

जन लोकायुक्त बिल पेश न होने पर दिया था इस्तीफा

jan lokayukt bill would be introduced soon in delhi assembly

वोटिंग में बिल पेश करने का प्रस्ताव गिर गया था। इससे पूर्व उपराज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर इस बिल को गैर कानूनी करार दिया था।

दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार पिछले साल जब जन लोकपाल बिल पेश नहीं कर पाने केकारण इस्तीफा देकर जनता के बीच गई तो लोगों ने कहा था, बाकी काम करने जरूरी थे। लोकपाल बिल में देरी से कोई दिक्कत नहीं।

यही वजह है कि इस बार सरकार बहुत जल्दबाजी में नहीं है। जन लोकायुक्त बिल, 2014 के ड्राफ्ट में कुछ हल्के फुल्के बदलाव को छोड़ दें तो वैसा ही होगा।

यूं तो नए कानून आने तक लोकायुक्त नियुक्ति सरकार नहीं चाहती लेकिन केन्द्र के निर्देश की वजह से ही दिल्ली के लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है।

नए कानून के साथ खुद ही खत्म हो जाएंगे पुराने प्रावधान

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नए कानून के आने पर दिल्ली लोकायुक्त-उपलोकायुक्त अधिनियम, 1995 और दिल्ली समयबद्ध सेवा अधिनियम, 2011 स्वयं खत्म हो जाएंगे। पुराने केस जनलोकपाल के पास ट्रांसफर हो जाएंगे।

नए कानून में जांच अधिकारी की नियुक्ति से लेकर भ्रष्टाचार जांच के लिए भवन के सर्च वारंट जारी करने, किसी ठेके को रद्द करने, व्हीसल ब्लोअर की सुरक्षा, ईमानदारी अधिकारी को ईनाम देने का कानून बनाने का भी अधिकार होगा।

कानून के लागू होने पर सरकारी कर्मी को प्रत्येक 31 जनवरी को प्रॉपर्टी की सूचना देनी होगी। इसके अलावा सरकारी नौकर के खिलाफ झूठी सूचना देने वालों पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी जनलोकपाल केपास होगा।

दिल्ली सरकार जनलोकपाल बिल, 2015 के अनुसार जनलोकपाल में एक चेयरमैन और 6-10 तक सदस्य होंगे। चेयरमैन की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी करेगी जिसमें नेता प्रतिपक्ष, उच्च न्यायालय के दो जज, पिछले चेयरमैन में से होंगे। सदस्यों में पचास फीसदी आरक्षित श्रेणी व महिला दावेदारों में होंगे।

व्हीसल ब्लोवर की रक्षा करेंगे दिल्ली के लोकायुक्त

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दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले (व्हीसल ब्लोवर) एक्टिविस्ट व अधिकारियों को सुरक्षा कवच देने की तैयारी की है। शुरुआत दिल्ली जन लोकायुक्त बिल, 2015 के प्रावधानों से होगी।

च्व्हीसल ब्लोवरज् को प्रताड़ित करने वाले भ्रष्टाचारी की श्रेणी में आएंगे। लोकायुक्त के पास च्व्हीसल ब्लोवरज् शिकायत कर सकेंगे जिसकी सुनवाई भ्रष्टाचार प्रावधानों के तहत की जाएगी। अभी तक देश भर में ऐसा कोई कानून नहीं है।

च्व्हीसल ब्लोवरज् की हत्या या हमले के बाद पुलिसिया कार्रवाई के तहत ही प्रावधान हैं। ड्राफ्ट कानून में भ्रष्टाचार की जो परिभाषा तय की गई है उसमें च्व्हीसल ब्लोवरज् को अगर कोई प्रताड़ित करता है तो यह भ्रष्टाचार माना जाएगा।

वहीं हर विभाग जो सिटीजन चार्टर में कार्य के दिन तय करेगा, अगर उसमें लगातार कोताही बरतता है और बिना वजह तंग करता है तो भी लोकायुक्त के दायरे में भ्रष्टाचार के तहत आएगा।

एक नजर में दिल्ली लोकायुक्त बिल के प्रावधान...

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  • एक मुख्य लोकायुक्त के साथ 10 लोकायुक्त को तैनात किए जाने की व्यवस्था
  • हाईकोर्ट की तरह मुकदमें की डबल बेंच में भी होगी सुनवाई।
  • दिल्ली के लोकायुक्त कानून में हर विभाग को सिटीजन चार्टर बनाकर निर्धारित समय सीमा सभी कार्यों की तय करनी होगी।
  • सिटीजन चार्टर का पालन नहीं होने की दशा में शिकायतकर्ता की शिकायत सुनने के लिए प्रत्येक विभाग में एक अपील अधिकारी की नियुक्ति होगी।
  • सिटीजन चार्टर में अपील अधिकारी की सुनवाई से संतुष्ट नहीं होने पर उपभोक्ता सीधे लोकायुक्त के पास शिकायत कर सकेगा।
  • सिटीजन चार्टर में निर्धारित समय सीमा पर सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने पर अधिकतम 50 हजार रुपये तक जुर्माना किया जा सकेगा।
  • दिल्ली जन लोकायुक्त के दायरे में दिल्ली सरकार के चपरासी से मुख्यमंत्री तक आएंगे।
  • लोकायुक्त की तरफ से तय मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा।
  • लोकायुक्त की तरफ से निर्धारित मामलों की अपील सिर्फ उच्च न्यायालय में ही हो सकेगी।
  • भ्रष्टाचार के मामले में अधिकतम सजा आजीवन करावास तक हो सकती है।
  • दिल्ली के 10 लोकायुक्त में पचास फीसदी कानून के विशेषज्ञ होंगे जबकि पचास फीसदी यानी पांच प्रशासन, वित्त या अन्य फील्ड के प्रतिष्ठित होंगे।
  • उत्तराखंड के लोकायुक्त बिल के आधार पर ड्राफ्ट किया गया है बिल।

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