जामिया रिसर्च स्कॉलर ने बताया तेज दौड़ती दुनिया में कैसे ठहर गई थी अरुणा
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यौन हिंंसा की घिनौनी वारदात की शिकार हुई नर्स अरुणा शानबाग के जीवन की त्रासदी को एक पीएचडी स्कॉलर ने कलमबद्ध किया है। तेजी से बदलते समाज में अरुणा ने तकरीबन 42 वर्षों तक ठहरी हुई जिंदगी जी।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में पीएचडी कर रहीं स्वाती शर्मा ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सुषमा सूरी के निर्देशन में अरुणा के जीवन के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करने की कोशिश की है।
स्वाती ने अपने इस अध्ययन के लिए पत्रकार पिंकी विरानी की पुस्तक अरुणा स्टोरी का सहारा लिया। अरुणा की दोस्त पिंकी ने ही उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की याचिका दायर की थी। लंबी बहस के बाद हालांकि अदालत ने याचिका अस्वीकार कर दी थी।
जामिया की रिसर्च स्कॉलर ने किया अध्ययन
स्वाती शर्मा ने अपने प्रोजेक्ट के लिए इस विषय को चुना क्योंकि वो अरुणा की कहानी के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को बारीकी से महसूस करते हुए उसे सबके सामने लाना चाहती थीं।
कौन थी अरुणा
अरुणा शानबाग मुंबई के किंग एडवार्ड मेमोरियल अस्पताल में नर्स थीं। सन 1973 में उसी अस्पताल में काम करने वाले एक वार्ड ब्वॉय ने उनके साथ जबरदस्ती की और उनके तन व मन को भारी चोट पहुंचाई।
इसके चलते वह करीब 42वर्षों तक बिस्तर पर रहीं। उनकी इच्छा मृत्यु की याचिका भी कोर्ट से अस्वीकार हो गई। आखिरकार निमोनिया के चलते 18 मई को उनकी मौत हो गई।