जामिया प्रबंधन ने दी सफाई- प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल थे बाहरी तत्व, छात्र नहीं हुए घायल
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नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच रविवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के बारे में चौंकाने वाली बात बताई। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बाहरी लोग शामिल थे। प्रशासन ने बताया कि विरोध प्रदर्शन यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर नहीं किया गया था।
बता दें कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय कैंपस में नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर रहे छात्रों ने शनिवार को कैंपस और बाहर सड़क पर फजर (सुबह की पहली नमाज) की नमाज के बाद 8 से 10 बजे के बीच सेमेस्टर परीक्षाएं लेने पहुंचे शिक्षकों को विभागों से बाहर निकाल ताला लगा दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि कैंपस में हजारों प्रदर्शनकारियों में छात्रों की संख्या बेहद कम है।
प्रशासन के अनुसार बाहरी लोगों के चलते प्रदर्शन उग्र हुआ। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान घायल 10 छात्रों में भी जामिया के छात्र नहीं थे। गौरतलब है कि प्रदर्शन उग्र होने पर जामिया प्रशासन ने सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इसके अलावा 16 दिसंबर से 5 जनवरी तक विश्वविद्यालय सर्दी की छुट्टियों के चलते बंद रहेगा।
शुक्रवार रात 12 से शनिवार सुबह 6 बजे तक किया गया प्रदर्शन
शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार सुबह 6 बजे तक प्रदर्शनकारी कैंपस में अंसारी ऑडिटोरियम के सामने लॉन से लेकर गेट के बाहर सड़क तक ठिठुरती ठंड में नारेबाजी करते रहे। इससे पहले पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने पर सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। इसके अलावा मोदी सरकार से अधिनियम वापस लेने की मांग करते रहे।
सुबह साढ़े 5 से 6 बजे फजर की नमाज
विरोध के बीच शनिवार सुबह पहली नमाज भी अदा की गई। पीएचडी स्कॉलर्स व एनएसयूआई जामिया यूनिट के अध्यक्ष इमरान चौधरी के मुताबिक, रातभर प्रदर्शन के बाद मुख्य सड़क और लॉन में प्रदर्शनकारियों ने फजर की नमाज अदा की और अल्लाह से दुआ की कि सरकार फैसले को वापस ले।
शनिवार सुबह 8 से 11 बजे तक अलग-अलग समूह में विभिन्न विभागों में जाकर सेमेस्टर परीक्षाओं को रद्द करवाया। इससे पहले छात्रों ने शनिवार को सेमेस्टर परीक्षाओं के बहिष्कार की घोषणा भी की थी। प्रदर्शनकारियों की घोषणा और अधिनियम के विरोध पर शिक्षक और कर्मी भी साथ थे।
हालांकि फैकल्टी ऑफ ह्यूमनाइटीज, यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटेक्निक, गणित विभाग, सोशल साइंस, एजेके मॉस कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर समेत अन्य विभागों में सेमेस्टर परीक्षाओं की तैयारी चल रही थी। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षकों और कर्मियों से बाहर आने को कहा। इसके बाद भी जो नहीं आ रहे थे, उन्हें हाथ जोड़कर विरोध में साथ देने के लिए राजी कर लिया। करीब सवा 11 बजे तक कैंपस के अधिकतर विभागों व सेंटर के बाहर ताला लग चुका था।