Jahangirpuri Riots: 2063 पन्नों की चार्जशीट, 45 पर आरोपपत्र, दो नाबालिगों के खिलाफ जेजे बोर्ड में मामला
पुलिस का कहना है कि अब तक की गई जांच और रिकॉर्ड की गई सामग्री से, यह पता चलता है कि वर्तमान घटना शाहीन बाग में 2019 और 2020 के सीएए और एनआरसी के विरोध और फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की निरंतरता में थी, जो और भी बढ़ गई।
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बृहस्पतिवार को रोहिणी अदालत में जहांगीरपुरी हिंसा मामले में 45 के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर दिया। इनमें से 8 आरोपी फरार है। दो नाबालिगों के खिलाफ पहले ही जेजे बोर्ड में मामला पेश किया गया है। मामले की सुनवाई 28 जुलाई को होगी। पुलिस के अनुसार आठ आरोपी अब भी फरार हैं। 16 अप्रैल को जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के दौरान दो समूहों के बीच झड़प के बाद से हिंसा हुई थी। मामले में अब तक 37 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
2063 पन्नों की चार्जशीट में हिंसा के साजिशकर्ताओं के नामों का विस्तृत जिक्र है। पुलिस ने आरोपपत्र में तर्क रखा कि सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। आरोपपत्र के अनुसार, दंगो में आठ पुलिसकर्मी और एक नागरिक घायल हुआ था। 37 में मुख्य आरोपी मोहम्मद अंसार, तारबेज शामिल हैं। मामले में इरशफिल फरार है। पुलिस ने सभी के खिलाफ 27 आर्म्स एक्ट के अलावा आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 323, 427, 436, 307, 120-बी के तहत आरोप पत्र दायर किया है। मामले की जांच 18 अप्रैल 2022 को अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी गई थी।
आरोपपत्र के अनुसार, फरार आठ आरोपियों सांवर कालिया, सद्दाम खान, सलमान, आशानूर, इशराफिल, जहांगीर, हसमत और शेख सिकंदर के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्यवाही चल रही है। आरोपपत्र में कहा गया है कि पुलिस ने आरोपियों से कुल नौ आग्नेयास्त्र, पांच कारतूस, दो कारतूस के खोखे, घटना के समय और वीडियो में देखे गए 11 आरोपियों से नौ तलवार और कपड़े बरामद किए गए हैं। कुसल सिनेमा रोड के आसपास स्थापित लोक निर्माण विभाग के 28 कैमरों के सीसीटीवी फुटेज, सी-ब्लॉक, जहांगीरपुरी के आसपास स्थापित पीडब्ल्यूडी के 30 कैमरों की फुटेज लेकर उनका विश्लेषण किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से 34 वायरल वीडियो और अन्य 56 वीडियो एकत्र किए गए जिनका विश्लेषण किया गया।
गिरफ्तार किए गए 37 आरोपियों में से 20 सीसीटीवी फुटेज/वायरल वीडियो में कैद हो गए थे। आरोपियों की पहचान के लिए तकनीक की मदद ली गई है। आरोपियों के पास से कुल 21 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। मामले में कुल 132 गवाहों से पूछताछ की गई, जिनमें से 85 पुलिस और 47 सार्वजनिक व्यक्ति/डॉक्टर और अन्य हैं।
आरोपियों की पृष्ठभूमि के विवरण, डंप डेटा, तकनीकी (एफआरएस) विश्लेषण, वायरल वीडियो संग्रह, सीसीटीवी फुटेज संग्रह आरोपियों की गिरफ्तारी, वित्तीय पहलू और साजिश आदि के सत्यापन के लिए कुल 13 टीमों को तैनात किया गया था।