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जबलपुर एयरपोर्ट विवाद: हाईकोर्ट ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई पर लगाई रोक
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-यह विवाद 4 जून 2019 को जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन को लेकर एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एएआई के बीच हुए समझौते से उत्पन्न हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन परियोजना से जुड़े विवाद में एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को राहत देते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को कंपनी के खिलाफ किसी भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई से फिलहाल रोका है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने यह आदेश कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला पहले से ही विवाद समाधान समिति (डीआरसी) के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए इस स्तर पर कोई भी त्वरित कार्रवाई उचित नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत उन दो बैंक गारंटियों पर लागू नहीं होगी, जिनके भुगतान की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। साथ ही, निर्देश दिया गया कि डीआरसी के अंतिम निर्णय के बाद भी 10 दिनों तक ठेकेदार के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
यह विवाद 4 जून 2019 को जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन को लेकर एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एएआई के बीच हुए समझौते से उत्पन्न हुआ। परियोजना में देरी, जुर्माने की राशि और अंतिम बिल को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए। कंपनी का कहना है कि देरी उसके कारण नहीं हुई और उसे समय विस्तार दिया गया था, जबकि एएआई का दावा है कि अंतिम बिल तैयार होने के बावजूद ठेकेदार ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। एएआई ने इसी आधार पर बैंक गारंटी भुनाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसका कंपनी ने विरोध करते हुए इसे मनमाना और अवैध बताया। कंपनी का तर्क है कि जब विवाद पहले से डीआरसी के पास लंबित है, तब इस तरह की कार्रवाई अनुचित है। वहीं, एएआई ने अदालत में कहा कि बैंक गारंटी बिना शर्त थीं और स्वतंत्र अनुबंध के रूप में लागू होती हैं। मामले की अगली सुनवाई की तिथि अभी तय नहीं की गई है, जबकि डीआरसी के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन परियोजना से जुड़े विवाद में एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को राहत देते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को कंपनी के खिलाफ किसी भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई से फिलहाल रोका है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने यह आदेश कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला पहले से ही विवाद समाधान समिति (डीआरसी) के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए इस स्तर पर कोई भी त्वरित कार्रवाई उचित नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत उन दो बैंक गारंटियों पर लागू नहीं होगी, जिनके भुगतान की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। साथ ही, निर्देश दिया गया कि डीआरसी के अंतिम निर्णय के बाद भी 10 दिनों तक ठेकेदार के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
यह विवाद 4 जून 2019 को जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन को लेकर एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एएआई के बीच हुए समझौते से उत्पन्न हुआ। परियोजना में देरी, जुर्माने की राशि और अंतिम बिल को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए। कंपनी का कहना है कि देरी उसके कारण नहीं हुई और उसे समय विस्तार दिया गया था, जबकि एएआई का दावा है कि अंतिम बिल तैयार होने के बावजूद ठेकेदार ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। एएआई ने इसी आधार पर बैंक गारंटी भुनाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसका कंपनी ने विरोध करते हुए इसे मनमाना और अवैध बताया। कंपनी का तर्क है कि जब विवाद पहले से डीआरसी के पास लंबित है, तब इस तरह की कार्रवाई अनुचित है। वहीं, एएआई ने अदालत में कहा कि बैंक गारंटी बिना शर्त थीं और स्वतंत्र अनुबंध के रूप में लागू होती हैं। मामले की अगली सुनवाई की तिथि अभी तय नहीं की गई है, जबकि डीआरसी के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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