{"_id":"58f0f7824f1c1bbb4ccf5488","slug":"islamic-center-imposes-fine-of-one-lakh-to-harm-godhan","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोधन को नुकसान पहुंचाने वालों पर इस्लामिक सेंटर ने लगाया एक लाख का जुर्माना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोधन को नुकसान पहुंचाने वालों पर इस्लामिक सेंटर ने लगाया एक लाख का जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Fri, 14 Apr 2017 09:53 PM IST
विज्ञापन
Godhan
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगीना के तब्लीग के जरिए दुनिया में शांति का पैगाम देने वाले मेवात की पहचान गोपालन से भी होती रही है। भले ही यहां दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले गोशालाएं कम हैं लेकिन गोधन पालने वालों की तादाद बड़ी है। जुम्मा की नमाज के बाद मेवात इस्लामिक सेंटर ने गोधन को नुकसान पहुंचाने वालों पर एक लाख रुपये दंड करने का फरमान सुनाया है।
वहीं इन गतिविधियों में शामिल लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। गत दिवस नूहं में हुई महापंचायत ने गोतस्करी एवं गोकशी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए न केवल इसे सामाजिक बुराई माना है बल्कि ऐसे लोगों की खिलाफत करने का फैसला सुनाया था।
मौलाना हकीमुद्दीन सनाबली ने बातचीत में बताया कि शुक्त्रस्वार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है जिसमें गोतस्करी करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। यह उन लोगों पर भी लागू होगा जो गोकशी व गोतस्करी करने वालों को शरण देते हैं। उन्होंने बताया कि मेवात क्षेत्र के लोग पशुपालन पर आधारित हैं। ऐसा कोई गांव नहीं मिलेगा जहां गाय नहीं पाली जाती है।
विज्ञापन
मेवात वही क्षेत्र है जहां बेटियों को शादी के बाद दान में गाय देने की तहजीब है। झिमरावट गांव के रायभान नंबरदार अपनी बेटियों को गोधन दान दे चुके हैं, उन्हें भी गाय दान मिली थी। इसी गांव के कंवर खां ने अपने बेटे हसन मोहम्मद की शादी में दहेज का त्याग करते हुए केवल गाय दान में ली थी।
घागस गांव के सोहराब नंबरदार ने अपनी इकलौती बेटी को दो गाय दान में दी थी। ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब मेवातियों ने दूसरे मजहब के लोगों को भी गोधन दान किया है।
विज्ञापन
वहीं इन गतिविधियों में शामिल लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। गत दिवस नूहं में हुई महापंचायत ने गोतस्करी एवं गोकशी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए न केवल इसे सामाजिक बुराई माना है बल्कि ऐसे लोगों की खिलाफत करने का फैसला सुनाया था।
विज्ञापन
मौलाना हकीमुद्दीन सनाबली ने बातचीत में बताया कि शुक्त्रस्वार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है जिसमें गोतस्करी करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। यह उन लोगों पर भी लागू होगा जो गोकशी व गोतस्करी करने वालों को शरण देते हैं। उन्होंने बताया कि मेवात क्षेत्र के लोग पशुपालन पर आधारित हैं। ऐसा कोई गांव नहीं मिलेगा जहां गाय नहीं पाली जाती है।
विज्ञापन
मेवात वही क्षेत्र है जहां बेटियों को शादी के बाद दान में गाय देने की तहजीब है। झिमरावट गांव के रायभान नंबरदार अपनी बेटियों को गोधन दान दे चुके हैं, उन्हें भी गाय दान मिली थी। इसी गांव के कंवर खां ने अपने बेटे हसन मोहम्मद की शादी में दहेज का त्याग करते हुए केवल गाय दान में ली थी।
घागस गांव के सोहराब नंबरदार ने अपनी इकलौती बेटी को दो गाय दान में दी थी। ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब मेवातियों ने दूसरे मजहब के लोगों को भी गोधन दान किया है।
गहने बेचकर बचा रहीं गोधन
godhan
मेवात की एक ऐसी भी बेटी है जो अपने गहने बेचकर न केवल गाय बचाने का संदेश दे रही है बल्कि गाय से होने वाले फायदों के बारे में जागरूक करने में जुटी है। गाय केयर आंदोलन की संचालक सबीला बताती हैं कि उनको भी गाय उनके मामा ने शादी में दान में दी थी। गाय बचाने के लिए वह अपने जेवरात बेचकर गोधन को बढ़ावा दे रही हैं।
वह गोपालन को मेवात के पशुपालकों की जीवन रेखा मानती हैं। वह बताती है कि हजारों गोपालक लाखों की संख्या में गाय पालते हैं। वह गाय बचाने के लिए अब तक 59 जागरूकता कार्यक्त्रस्म, अलवर, भरतपुर, गुरूगाम, फरीदाबाद और मेवात में कर चुकी हैं।
वह गोपालन को मेवात के पशुपालकों की जीवन रेखा मानती हैं। वह बताती है कि हजारों गोपालक लाखों की संख्या में गाय पालते हैं। वह गाय बचाने के लिए अब तक 59 जागरूकता कार्यक्त्रस्म, अलवर, भरतपुर, गुरूगाम, फरीदाबाद और मेवात में कर चुकी हैं।