फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Irrational use of antibiotics is increasing the problems of patients

Delhi: एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कहीन उपयोग बढ़ा रहा समस्या, दवाओं का असर होता है कम; शरीर को कमजोर कर देता रोग

Sun, 13 Apr 2025 02:12 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Sun, 13 Apr 2025 02:12 PM IST
सार

बैठक में एनसीडीसी में बैक्टीरियल रोग एवं औषधि प्रतिरोध व एएमआर रोकथाम केंद्र की अतिरिक्त निदेशक और प्रमुख डॉ. लता कपूर ने कहा कि देश में एएमआर के संकट पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। यह मूक महामारी बन गया है। 

विज्ञापन
Irrational use of antibiotics is increasing the problems of patients
बैठक में शामिल चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कहीन उपयोग मरीजों की समस्याएं बढ़ा रहा है। इसके कारण बढ़ता रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) एक मूक महामारी बन गया है। इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली में विशेषज्ञों ने राउंड टेबल बैठक की। विशेषज्ञों ने कहा कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध तब होता है जब संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया, वायरस, कवक या परजीवी, दवाओं के प्रतिरोधक हो जाते हैं और दवाएं असर नहीं करतीं। 

विज्ञापन


बैठक में एनसीडीसी में बैक्टीरियल रोग एवं औषधि प्रतिरोध व एएमआर रोकथाम केंद्र की अतिरिक्त निदेशक और प्रमुख डॉ. लता कपूर ने कहा कि देश में एएमआर के संकट पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। यह मूक महामारी बन गया है। आईसीयू और आपातकालीन सेटअप में एंटीबायोटिक दवाओं का तर्कहीन उपयोग चिंताजनक है। यह अक्सर निदान में देरी और अनुभव के अभाव में होता है।
विज्ञापन


पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण आवश्यक
इसकी रोकथाम के लिए पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण आवश्यक है। एएमआर रोकथाम रणनीतियों में एकीकृत किया जाना चाहिए। सरकार नैदानिक प्रबंधन और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य सेवा उद्योग, निजी प्रयोगशालाओं और चिकित्सकों के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर यदि पर्ची पर दवा लिखते समय इसका विशेष ध्यान दें तो समस्या को रोका जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दवाएं वायरल इंफेक्शन पर कारगर नहीं
वहीं, डॉ. राजीव गौतम ने कहा कि एएमआर की रोकथाम के लिए एक जांच उपलब्ध है। इस जांच में मधुमेह की तरह कुछ सेकेंड में पता चल जाएगा कि मरीज को एंटीबायोटिक्स दवाएं देने की जरूरत है या नहीं। यह दवाएं वायरल इंफेक्शन पर कारगर नहीं हैं, लेकिन अनुभव के अभाव में डॉक्टर इन्हें लिख देते हैं। बेवजह इनका इस्तेमाल दवाओं के असर को खत्म कर देता है।

एंटीबायोटिक दवाएं ही असर नहीं कर रहीं
वहीं, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. विकास मनचंदा ने कहा कि लोकनायक अस्पताल में इलाज करवाने आ रहे बच्चों में देखा गया है कि उन्हें वायरल फीवर में भी एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं। इस गलत प्रक्रिया के कारण अब उनमें एंटीबायोटिक दवाएं ही असर नहीं कर रहीं। उन्होंने कहा कि वायरल के 95 फीसदी से अधिक मामलों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल की कोई जरूरत नहीं होती। ऐसे में दवाओं को लिखने से पहले रोग की पकड़ जरूरी है।


डॉक्टर की सलाह के बिना लेते हैं दवाएं
डॉ. विकास मनचंदा ने कहा कि भारत में अक्सर लोग दवा की दुकानों से बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं ले लेते हैं। यह आसानी से उपलब्ध भी हैं। इसमें देखा गया है कि दवा बेचने वाले बिना सोचे कुछ भी दे देते हैं। इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। यदि लोग दवाओं के इस्तेमाल को लेकर जागरूक होंगे तो इस समस्या को जल्द रोका जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed