नोएडा बन रहा है लजीज भोजन का कॉरपोरेट हब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभी तक शहर को उद्योगों के लिए जाना जाता था लेकिन नोएडा सस्ते और लजीज भोजन में भी बाजी मार रहा है। बात है आईआरसीटीसी के सेंट्रल किचन की जो कॉरपोरेट सेक्टर्स में आठ हजार लोगों को खाना उपलब्ध करा रहा है।
दो सब्जी, एक नॉनवेज या पनीर, रोटी, चावल और मिठाई। अच्छी क्वालिटी का इतना सब कुछ महज 75 रुपये में उपलब्ध है। इसलिए आईआरसीटीसी को कई बड़ी कंपनियों से पैक्ड फूड के लिए स्थायी आर्डर मिल गए हैं।
आईआरसीटीसी की सफलता को देखते हुए कुछ और उद्यमी भी इस क्षेत्र में बढ़े हैं। इस तरह से नोएडा लजीज भोजन का कॉरोपोरेट हब बनता जा रहा है।
आठ नामी कंपनियों को खाना पहुंचा रहा है ये किचन
2012 में सेक्टर 64 के ए ब्लॉक स्थित आईआरसीटीसी सेंट्रल किचन ने एक कॉरपोरेट कंपनी के 100 कर्मचारियों को खाना उपलब्ध करने के साथ शुरुआत की थी।
फिलहाल सेंट्रल किचन आठ नामी कंपनियों के आठ हजार कर्मचारियों को खाना पहुंचा रहा है। इसके अलावा अहमदाबाद राजधानी और सियालदाह दूरंतों में दो हजार यात्रियों का रात का खाना भी सेंट्रल किचन से जाता है। दिल्ली से चलने वाली राजधानी और दूरंतों में 6500 लोगों को शाम का स्नैक्स भी यही से जाता है।
आईआरसीटीसी के अपर महाप्रबंधक सुधीर वारियर बताते हैं कि किचन आईएसओ सर्टिफाइड है और कच्चे माल से लेकर पके भोजन तक सेंट्रल किचन के माइक्रोबायलॉजी लैब में जांच होती है।
मेन्यू शुरू होता है 50 रुपए से
यहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्टाफ पूरी तरह से दक्ष है और खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण अच्छी क्वालिटी के है। खाना बनाने में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
खाना बनाने में भी आरओ का पानी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि खाने पर कुछ विवाद उठे थे लेकिन उनमें सत्यता नहीं निकली। उन्होंने बताया कि कंपनियों को मेन्यू ई-मेल किए जाते हैं और जो मेन्यू कंपनी चयन करती है, उसी के आधार पर खाना भेजा जाता है।
खाने का मेन्यू 50 रुपये से शुरू होता है। इसमें कॉम्बो मेन्यू भी हैं। मेन्यू में चाइनीज, इटैलियन, बेकरी आइटम, कई तरह के सलाद और मिठाईयां आदि शामिल हैं।
ताकि भूखे न रहें मरीज
सेक्टर-33 स्थित गोविंदम में 100 रुपये में थाली उपलब्ध है। इसमें दो सब्जियां, दाल, रायता, पापड़, चावल और तीन रोटी शामिल हैं। इस्कॉन प्रबंधन के मुताबिक खाना देसी घी में और बिना प्याज व लहसुन के बनाया जाता है। आप कोई चीज दोबारा लेना चाहें तो उसके लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
इस्कॉन के प्रवक्ता बुद्धिमत्ता दास बताते हैं कि करीब एक माह के लिए भोजन की व्यवस्था निर्माण कार्य के चलते बंद की गई है। अभी सिर्फ भारतीय खाना ही मिल रहा है। सितंबर में वातानुकूलित कैंटीन शुरू होगी, जिसके बाद एक बार फिर थाली की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति यहां आकर खाना खा सकता है।
नोएडा में ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो मरीजों को निशुल्क भोजन देती हैं। इसमें सेक्टर-61 स्थित साईं मंदिर और स्वंयसेवी संस्था नोएडा लोक मंच का नाम शामिल है। साईं मंदिर की ओर से जिला अस्पताल के मरीजों को दोपहर के खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी, सलाद और दही मरीजों को देता है।
रात के खाने में नोएडा लोकमंच मरीजों को खिचड़ी उपलब्ध कराता है। यदि कोई परिजन भी खुद के खाने की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं होता तो यह उन्हें भी यह खाना देती हैं।