International Trade Fair: ऐपण कला से रूबरू करा रहीं मीनाक्षी खाती, कहीं दीये तो कहीं बन रहे मिट्टी के बर्तन
मेले में रामनगर (नैनीताल) से आईं मीनाक्षी खाती ने बताया कि ऐपण उनके यहां की लोक कला है। इसमें सफेद और लाल रंग होते हैं। मीनाक्षी ने बताया कि वह उत्तराखंड में मीनाकृति द ऐपण प्रॉजेक्ट नामक एक संस्था चलाती हैं। वह बताती है कि इसका मकसद ऐपण कला को जीवित रखना है।
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प्रगति मैदान के भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में बुधवार को लोग उत्तराखंड की ऐपण कला से रूबरू हुए। अपनी तरह यह अनूठी कला पूरे मेले में चमक बिखेरती दिखी। एक बार को तो लोग दीवार पर गेरुआ के ऊपर चावल के लिक्विड पेस्ट से बनीं आकृतियों को देख आधुनिक दीवार वाले पेंट को भूल गए।
मेले में रामनगर (नैनीताल) से आईं मीनाक्षी खाती ने बताया कि वह उनके यहां की लोक कला है। इसमें सफेद और लाल रंग होते हैं। लोग इन्हें देखकर सवाल कर रहे हैं कि क्या ये कृतियां पश्चिम बंगाल से हैं या राजस्थान से। जो लोग उत्तराखंड से हैं, वह ऐपण को देखकर अपनी ईजा (मां) और दादी को याद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वह जब अपने गांव में थे, तब मम्मी और दादी का ऐपण बनाने में हाथ बंटाते थे।
मीनाक्षी ने बताया कि जिन लोगों के लिए यह नया है, उनके लिए वह लकड़ी पर ऑइल कलर व कैनवस पर आर्किलिक कलर का इस्तेमाल कर विभिन्न कृतियां लेकर आईं हैं। इनमें माता की चौकी, लिफाफे, बुकमार्क, ऐपण वाले बैग, स्टिकर, पेंटिंग समेत अन्य दूसरे आइटम हैं। साथ ही ठेठ उत्तराखंडवासियों के लिए श्रृंगार व सजने के लिए कुमाऊंनी पिछौड़ा, गलोबंद व नथ हैं। मीनाक्षी ने बताया कि वह उत्तराखंड में मीनाकृति द ऐपण प्रॉजेक्ट नामक एक संस्था चलाती हैं। वह बताती है कि इसका मकसद ऐपण कला को जीवित रखना है।
मिट्टी के दीये चाहिए, आओ खुद बना लो
हॉल संख्या 6 में बने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के पवेलियन में खुद मिट्टी के बर्तन व दीये बनाने की सुविधा है। बुधवार को लोगों ने 50 रुपये में अपने लिए दीये व बर्तन बनाए। स्टॉल पर मौजूद कुम्हार त्रिभुवन प्रसाद प्रजापति ने बताया कि वह आजमगढ़ यूपी के रहने वाले हैं। वह घर से मेले के लिए 50 किलो मिट्टी लेकर आए हैं, ताकि लोगों को मिट्टी का सामान बनाना सिखा सकें। लोग अपना बनाया हुआ दीया या बर्तन बनाकर दुकान में छोड़ जाते हैं और उन्हें दुकान से उनकी पसंद का पका हुआ दूसरा बर्तन दिया जाता है।
भविष्य की रेलवे से परिचित करा रहा रेल मंडप
भविष्य की रेलवे कैसी होगी, इसकी झांकी अगर आपको देखनी हो तो प्रगति मैदान में आयोजित ट्रेड फेयर पहुंचना बेहतर होगा। रेलवे ने हॉल नंबर 4 में ‘फ्यूचरिस्टिक इंडियन रेलवेज’ को दर्शाया है। मॉडल, तस्वीर और ट्रांसलाइट्स के माध्यम से तकनीकी और संरचनात्मक प्रगति देखने को मिल रहा है। रेलवे मंडप के बाहरी हिस्से में राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के प्रस्तावित साबरमती स्टेशन को दर्शाया गया है। बुलेट ट्रेन के लिए इसी तरह का स्टेशन तैयार करने की योजना है। विशेष आकर्षण जम्मू कश्मीर में बने अंजी पुल, रामेश्वरम में समुद्र के बीचों बची बने हाइड्रोलिक पंबन ब्रिज का मॉडल हैं। भारत की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन, वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत ट्रेन, इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के मॉडल भी प्रदर्शित किया गया है जो दर्शकों को काफी लुभा रहा है। यह मंडप सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है। हर आयु वर्ग के लोग दिलचस्पी ले रहे हैं। वंदे भारत स्लीपर का मॉडल दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा रहा है। स्क्रीन के माध्यम से रेलवे की उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए क्विज, बच्चों का मनोरंजन कराने के साथ शिक्षित भी कर रहा है।