{"_id":"673a70a00b3228fed20fc814","slug":"international-men-s-day-thousands-of-wive-victims-husbands-gathered-at-jantar-mantar-2024-11-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस : जंतर-मंतर पर जुटे हजारों पत्नी पीड़ित पति, प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस : जंतर-मंतर पर जुटे हजारों पत्नी पीड़ित पति, प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल
Mon, 18 Nov 2024 04:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 Nov 2024 04:09 AM IST
सार
प्रदर्शन इसलिए किया गया ताकि देश भर में पुरुषों की आत्महत्याओं में खतरनाक वृद्धि की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके, खासकर वैवाहिक और रिश्ते संबंधी विवादों के कारण।
विज्ञापन
पीड़ित पति...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर एनसीएमइंडिया काउंसिल फॉर मेन अफेयर्स ने रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। ताकि देश भर में पुरुषों की आत्महत्याओं में खतरनाक वृद्धि की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके, खासकर वैवाहिक और रिश्ते संबंधी विवादों के कारण।
विज्ञापन
इस दौरान दिल्ली समेत हरियाणा, यूपी, पंजाब समेत अन्य राज्यों से आए प्रदर्शनकारी ने हाथों में बैनर व तख्तियां लिए हुए थे। प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने पुरजोर शब्दों में सरकार से पुरुष आयोग का गठन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें राष्ट्रीय पुरुष आयोग की स्थापना और लिंग-तटस्थ कानून लागू करने की मांग की जाएगी।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पुरुष आयोग के गठन की मांग वाले बैनर लेकर जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए महिला आयोग बनाया गया है तो पुरुषों की परेशानियों को सुनने के लिए पुरुष आयोग का गठन होना जरूरी है। समाज में लिंग के आधार पर समानता लाने के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकार वाले कानून अनिवार्य हैं। ऐसा न होने से कई पुरुष बेवजह झूठे मामलों में फंसाए जा रहे हैं और कानून भी उनकी कोई दलील नहीं सुनता।
विज्ञापन
संगठन के निदेशक कानून निर्माताओं और न्यायपालिका ने महिलाओं के जीवन, स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए कुछ कानून बनाए हैं। लेकिन, कुछ आपराधिक मानसिकता वाले लोगों ने इन महिला केंद्रित कानूनों का इस्तेमाल निर्दोष लोगों से जबरन वसूली और उत्पीड़न करने के लिए करना शुरू कर दिया है। जो कानून कमजोर लोगों को बचाने के उद्देश्य से बनाया गया था।