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Delhi NCR News: 27 नवंबर को हर साल मनेगा बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस
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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चार सितंबर को प्रस्ताव पारित किया
भुवन ऋभु की पहल को मिली वैश्विक मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। चार सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। भारत ने इसी तारीख को बाल विवाह के खिलाफ बड़ा जनअभियान शुरू किया था, और अब यह तारीख पूरी दुनिया के बच्चों के नाम होगी।
इस पहल की शुरुआत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक भुवन ऋभु ने मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र मंच पर की थी। सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो ने भी समर्थन दिया, जिसके बाद सिएरा लियोन ने करीब 50 देशों के साथ प्रस्ताव रखा और चार सितंबर को महासभा ने इसे पारित कर दिया।
दिल्ली में बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठन बाल विकास धारा ने इस फैसले को बाल अधिकारों की लड़ाई में ऐतिहासिक पड़ाव बताया।
जेआरसी देश के 782 जिलों में अभियान चला रहा है और उसके अनुसार सरकार व कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर अब तक 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए गए हैं। एनएफएचएस-5 (2019-21) में 18 वर्ष से पहले शादी करने वाली महिलाओं की संख्या 23.3 प्रतिशत थी, जो एनएफएचएस-6 (2023-24) में घटकर 20.1 प्रतिशत रह गई है। भारत ने 2026 तक यह दर 10 प्रतिशत और 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
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भुवन ऋभु की पहल को मिली वैश्विक मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। चार सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। भारत ने इसी तारीख को बाल विवाह के खिलाफ बड़ा जनअभियान शुरू किया था, और अब यह तारीख पूरी दुनिया के बच्चों के नाम होगी।
इस पहल की शुरुआत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक भुवन ऋभु ने मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र मंच पर की थी। सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो ने भी समर्थन दिया, जिसके बाद सिएरा लियोन ने करीब 50 देशों के साथ प्रस्ताव रखा और चार सितंबर को महासभा ने इसे पारित कर दिया।
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दिल्ली में बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठन बाल विकास धारा ने इस फैसले को बाल अधिकारों की लड़ाई में ऐतिहासिक पड़ाव बताया।
जेआरसी देश के 782 जिलों में अभियान चला रहा है और उसके अनुसार सरकार व कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर अब तक 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए गए हैं। एनएफएचएस-5 (2019-21) में 18 वर्ष से पहले शादी करने वाली महिलाओं की संख्या 23.3 प्रतिशत थी, जो एनएफएचएस-6 (2023-24) में घटकर 20.1 प्रतिशत रह गई है। भारत ने 2026 तक यह दर 10 प्रतिशत और 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
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