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EXCLUSIVE: अंतरराष्ट्रीय मेले को बना दिया चांदनी चौक का पटरी बाजार
ओम प्रकाश/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 14 Feb 2014 11:15 PM IST
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28वें सूरजकुंड मेले के नाम एक नया रिकॉर्ड जुड़ रहा है। यह रिकॉर्ड है शिकायत का। मेले में आए 50 से अधिक नेशनल अवॉर्डी एवं शिल्प गुरुओं ने यहां की व्यवस्था से दुखी होकर केंद्र सरकार को मेला प्रशासन के खिलाफ शिकायत दी है, जिसमें इस मेले को चांदनी चौक का पटरी बाजार बताया गया है।
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शिल्प गुरु प्रदीप मुखर्जी ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली के उद्योग भवन स्थित वस्त्र मंत्रालय के सचिव को शिकायत दी। इसमें मेले की व्यवस्था से दुखी 50 से अधिक शिल्पियों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने अपने मोबाइल नंबर भी लिखे हैं।
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पत्र में शिल्पियों ने लिखा है कि बहुत नाम सुनकर वह लोग यहां आए थे, लेकिन शुरू से ही मेला आयोजकों की व्यवस्था एवं अराजकता देख सब हतोत्साहित होने लगे। दो दिनों तक तो कई शिल्पकार पास के लिए भटकते रहे। इस दौरान उन्हें दर्शकों की तरह 70 रुपये की टिकट लेकर अपने स्टॉल तक पहुंचना पड़ा।
सबसे बड़े शिल्प सम्मान से नवाजे गए मुखर्जी लिखते हैं कि जिनका कला, शिल्प से कोई वास्ता नहीं, वह यहां मशीन निर्मित, चाइनीज ज्वैलरी, रैक्सिन की जूतियां, मशीन प्रिंटेड कपड़े, चादरें एवं प्लास्टिक के खिलौने आदि लेकर बैठे हुए हैं। इस तरह नेशनल अवॉर्डियों के स्टॉल इन व्यापारियों से दब गए।
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ऐसा लगता है कि मानों यह विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प मेला चांदनी चौक का पटरी बन गया हो। हस्तशिल्प मेला अपना मूल स्वरूप खोकर पटरी मेले में बदल दिया गया है।
शिकायत में उनका यहां तक कहना है कि कई दिन तक तो शिल्पकारों के स्टॉल पर उनके परिचय तक नहीं लगाए गए। फिर डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडीक्राफ्ट) के सहयोग से सातवें दिन यह काम किया गया। शिल्पियों ने वस्त्र मंत्रालय के सचिव से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने का आग्रह किया है, ताकि इस मेले की मूल भावना को सुरक्षित रखा जा सके।