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पोक्सो के मामलों में अंतरिम मुआवजा देना विशेष अदालत की जिम्मेदारी: हाईकोर्ट
Wed, 17 Jun 2020 12:14 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 17 Jun 2020 12:14 PM IST
सार
- - यौन शोषण पीड़ित बच्चियों की मां ने मुआवजा बढ़ाने की लगाई थी गुहार
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पोक्सो के मामलों में नाबालिग पीड़िता को अंतरिम मुआवजे का आदेश जारी करना विशेष अदालत की जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी विधिक सेवा प्राधिकारियों को नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने एक मामले का निपटारा करते हुए मंगलवार को यह बात कही। दो नाबालिग बच्चियों की मां ने याचिका दायर कर अंतरिम मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी।
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न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि पोक्सो में मुआवजा दिए जाने की कोई विशेष योजना नहीं है और नेशनल लीगल सर्विस अथोरिटी (नालसा) की योजना पोक्सो के मामलो में लागू नहीं होती। ऐसे हालात में नालसा की योजना को दिशा निर्देश मानते हुए पीड़िता को मुआवजा देने का आदेश जारी करना चाहिए।
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इन बच्चियों ने अपने पिता पर शारीरिक व मानसिक शोषण का आरोप लगाया था। विशेष अदालत ने सितंबर 2018 में इन बच्चियों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा दिल्ली विक्टिम कंपनसेशन योजना के तहत देने का आदेश दिया था। इनकी मां ने मुआवजा बढ़ाने के लिए अदालत में अर्जी दी थी जिसे विचार के लिए दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेज दिया गया था। प्राधिकरण ने कहा था कि अंतरिम मुआवजा देने का अधिकार केवल विशेष अदालत के पास है। इस फैसले को बच्चियों की मां ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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