दिल्ली में बिछ गई बिसात, जान लो अपने उम्मीदवार
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यहां से कांग्रेस, भाजपा और ‘आप’ के कद्दावर प्रत्याशी भिड़ेंगे। यहां से कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन और ‘आप’ के नेता आशुतोष मैदान में हैं। 2009 के चुनाव में कपिल सिब्बल ने भाजपा प्रत्याशी व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को हराया था।
मुस्लिम बहुल सीट होने के नाते कांग्रेस इस सीट पर जीत की प्रबल संभावना तलाश रही है। वहीं, ‘आप’ के प्रत्याशी आशुतोष और डॉ. हर्षवर्धन वैश्य समुदाय से हैं। लिहाजा वैश्य वोटों में बंटवारा तय है। इस संसदीय सीट पर दस में से चार विधानसभा सीटों पर ‘आप’ का कब्जा है जबकि तीन भाजपा और चांदनी चौक व बल्लीमारान कांग्रेस के हाथ में है। एक सीट जेडीयू के पास है।
विधानसभा चुनाव में कुल मतों की बात करें तो ‘आप’ 2.99 लाख के साथ पहले नंबर पर, 2.93 लाख के साथ भाजपा दूसरे व 2.43 लाख के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: धुरंधर बनाम नए खिलाड़ी
यहां से राजनीति के पुराने धुरंधर व नए खिलाड़ी के बीच मुकाबला होगा। यहां से कांग्रेस के जेपी अग्रवाल, भाजपा के मनोज तिवारी और ‘आप’ की तरफ से जेएनयू के प्रोफेसर आनंद कुमार मैदान में हैं।
पिछले आम चुनाव में जेपी अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी बीएल शर्मा प्रेम को बड़े अंतर से हराया था। मुस्लिम बहुल सीट होने के नाते कांग्रेस इस सीट को भी पार्टी के लिए सकारात्मक मान रही है। भाजपा ने इस सीट पर पूर्वांचली कार्ड खेला है।
यहां की दस में से पांच विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। जबकि तीन पर आप और दो पर कांग्रेस काबिज है। विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच 70 हजार मतों का अंतर है।
नई दिल्ली: मीडिया बनाम मीडिया का मुकाबला
इस सीट पर भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी मैदान में हैं जबकि कांग्रेस ने दिग्गज अजय माकन को फिर से मुकाबले में उतारा है। वहीं,‘आप’ ने पत्रकार आशीष खेतान को उतारा है। मसलन इस सीट पर मीडिया और मीडिया को खबर बताने वालों के बीच मुकाबला दिखेगा।
विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस का कोई प्रत्याशी जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच सका है। यहां केंद्रीय कर्मचारी वर्ग के वोटर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पिछले लोकसभा चुनाव में माकन ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल को हराया था।
हालांकि, विस चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से इस सीट पर पराजित हुई है। दस में से सात सीट ‘आप’ के पास जबकि तीन पर भाजपा का कब्जा है। ‘आप’ को यहां से 3.42 लाख, भाजपा को 3 लाख और कांग्रेस को 2.15 लाख वोट मिले थे।
उत्तर-पश्चिम दिल्ली: यहां है सीट बचाने की जंग
कांग्रेस ने यहां से फिर केन्द्रीय मंत्री व दो बार की सांसद कृष्णा तीरथ पर भरोसा जताया है। वहीं, भाजपा ने उदित राज को उतारा है, जिन्हें बाहरी माना जा रहा है। ऐसे में जहां महिला सीट बचाने की जंग होगी, वहीं बाहरी बनाम क्षेत्रीय की जंग भी दिखेगी।
उदित राज दूसरी पार्टी से भाजपा में आए हैं। भाजपा में उनकी उम्मीदवारी को लेकर विरोध चल रहा है। इसके अलावा ‘आप’ के महेंद्र सिंह का टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री राखी बिड़लान का नाम चर्चा में चल रहा है। हालांकि, कृष्णा तीरथ को लेकर भी यहां विधानसभा चुनाव से ही भारी विरोध चल रहा है।
इस आरक्षित सीट से जीते विधायक खुले तौर पर भी कृष्णा तीरथ का विरोध जता चुके हैं। यहां दस में से पांच विधानसभा सीट भाजपा के पास हैं। ‘आप’ के खाते में दो और कांग्रेस के खाते में दो विधायक हैं। इस सीट पर भाजपा को 4.96 लाख, ‘आप’ को 3.42 लाख व कांग्रेस को 3.04 लाख वोट मिले थे।
पूर्वी दिल्ली: क्षेत्रीय बनाम बाहरी की जंग
कांग्रेस ने पूर्वी दिल्ली से दो बार के सांसद संदीप दीक्षित को मौका देकर तय कर दिया है कि मुकाबला बाहरी बनाम क्षेत्रीय होगा। भाजपा ने राजनीति से दूर रहने वाले महेश गिरि को मौका दिया है। वहीं, AAP ने भी राजमोहन गांधी को मैदान में उतारा है।
कांग्रेस नेता दोनों पार्टी के प्रत्याशियों को बाहरी बता रहे हैं। संदीप दीक्षित को कॉमनवेल्थ गेम्स से अब तक के कार्यों का फायदा मिल सकता है। भाजपा के आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े महेश गिरि को लेकर पार्टी में विरोध है। पूर्वी दिल्ली में भी मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
कांग्रेस इसे अपने पक्ष में मान रही है। विधानसभा चुनाव में यहां की दस में से पांच सीट आम आदमी पार्टी को मिली हैं। भाजपा को तीन और कांग्रेस के खाते में दो सीट आई हैं। भाजपा को यहां से 3.62 लाख, कांग्रेस को 3.28 लाख और आम आदमी पार्टी को 3.15 लाख वोट मिले हैं।
पश्चिमी दिल्ली: यहां भारी है बीजेपी का पलड़ा
इस सीट से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को टिकट देकर जाट कार्ड खेला है। हालांकि, इस लोकसभा सीट पर पंजाबी-सिख समुदाय की तादात अधिक है। आसपास के विधानसभा में जाट समुदाय की तादात भी है।
लिहाजा, वहां भाजपा को फायदा पहुंच सकता है, लेकिन ‘आप’ प्रत्याशी जनरैल सिंह उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। इस सीट पर अभी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है।
पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने दस में से चार विधानसभा में जीत दर्ज की थी। यहां भाजपा के पक्ष में 4.5लाख वोट पड़े जबकि AAP को 3.8 लाख और कांग्रेस के पक्ष में 2.6 लाख वोट पड़े। अन्य पार्टियों के मुकाबले यहां भाजपा का पलड़ा भारी है।
दक्षिणी दिल्ली: हारे हुए उम्मीदवारों से जीत की उम्मीद
पिछले लोकसभा चुनाव में वो सज्जन कुमार के भाई रमेश कुमार के हाथों शिकस्त खा चुके गुर्जर नेता रमेश बिधूड़ी पर भाजपा ने एक बार फिर दांव खेला है।
हालांकि, इस बार दक्षिणी दिल्ली लोकसभा में भाजपा की स्थिति ठीक दिखाई पड़ रही है। दक्षिण दिल्ली से AAP ने कर्नल देवेंद्र सहरावत को मैदान में उतारा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिजवासन सीट से चुनाव लड़ने वाले सहरावत दूसरे नंबर पर थे।
इस सीट पर भी कांग्रेस ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां भाजपा के पक्ष में 3.59 वोट पड़े। जबकि AAP के खाते में 2.97 मत आए वहीं कांग्रेस को कुल 61584 वोट मिले थे।