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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Interest and penalties on outstanding property tax arrears waived; benefit available until December 31

Delhi NCR News: संपत्ति कर के पुराने बकाये पर ब्याज-जुर्माना माफ, 31 दिसंबर तक मिलेगा लाभ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 07:05 PM IST
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वन प्लस सेवन योजना में चालू वित्त वर्ष समेत पिछले सात साल का मूल कर जमा करना होगा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने संपत्ति कर के पुराने बकाया के निपटारे के लिए ‘संपत्तिकर निपटान योजना (सुनियो) 2.0-वन प्लस सेवन’ शुरू की है। योजना के तहत संपत्ति करदाता वित्त वर्ष 2026-27 और पिछले सात वित्त वर्षों यानी 2019-20 से 2025-26 तक का मूल कर जमा करके इससे पहले के बकाये पर लगने वाले ब्याज और जुर्माने से राहत पा सकेंगे। योजना 29 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।
स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा के अनुसार, योजना का उद्देश्य पुराने संपत्ति कर मामलों का निपटारा कर करदाताओं को अपना खाता नियमित करने का अवसर देना है। लाभ लेने के लिए करदाताओं को निगम के संपत्ति कर पोर्टल पर ऑनलाइन विवरणी दाखिल कर निर्धारित मूल कर का भुगतान करना होगा। उन्होंने बताया कि जिन करदाताओं की कुल देनदारी पांच लाख रुपये या उससे अधिक है, उन्हें योजना की अवधि के भीतर बराबर किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है। हालांकि, पूरी देनदारी तय अवधि में जमा नहीं करने पर योजना का लाभ समाप्त हो जाएगा। वर्ष 2019-20 से पहले के वर्षों का कर पहले जमा कर चुके करदाता भुगतान की रसीद पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। एक संपत्ति के लिए एक से अधिक यूपीआईसी होने पर उन्हें ऑनलाइन एक करने की सुविधा भी दी गई है। भुगतान के बाद कर रसीद स्वत: जारी होगी।
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मुकदमे वाले करदाताओं को भी विकल्प
सत्या शर्मा ने बताया कि अदालत में संपत्ति कर का मामला लंबित होने पर भी निर्धारित शर्तों के साथ योजना का लाभ लिया जा सकता है। इसके लिए लंबित मामला वापस लेने और जमा या वसूली गई राशि पर भविष्य में किसी वापसी या समायोजन का दावा नहीं करने का लिखित वचन देना होगा। मगर केंद्र व राज्य सरकार, रेलवे, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त एवं वैधानिक निकाय, सरकारी स्कूल-कॉलेज, प्राधिकरण, निगम और अन्य सरकारी विभागों की संपत्तियों को योजना में शामिल नहीं किया गया है। एमसीडी एक अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2028 के बीच दाखिल विवरणियों की जांच करेगा। कम भुगतान मिलने पर अंतर राशि के साथ 30 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है।
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