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दर्जनों बस-ट्रकों की बीमा पॉलिसी फर्जी निकली, फंस गए वाहन मालिक

Tue, 23 Jul 2019 06:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 23 Jul 2019 06:58 AM IST
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 Insurance policy of dozens of bus-trucks bogus vehicle owners trapped 
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

परिवहन विभाग के झुलझुली ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर में दर्जनों बसों और ट्रकों के फर्जी बीमा मिलने का मामला प्रकाश में आया है। सस्ती बीमा पॉलिसी के लालच में बसों और ट्रकों के मालिकों द्वारा ऐसी बीमा पॉलिसी कराई गई है। फिटनेस सेंटर पर क्यूआर कोड स्कैन नहीं हुए तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। परिवहन विभाग अब इस संबंध में सख्ती से वाहनों की जांच कर रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक, झुलझुली ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर में हाल ही दर्जनों बस और ट्रकों की जांच के दौरान बीमा फर्जी मिलने पर फिटनेस रोक दी गई और वाहन मालिकों के दस्तावेज लौटा दिए गए। इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा बस और ट्रक मालिकों पर कार्रवाई करने के संकेत दिए तो उससे पहले ही फर्जी बीमा वाले वाहन वहां से वापस लौट गए। इसके बाद वे फर्जी बीमा के साथ वापस नहीं आए। 
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इस संबंध में दिल्ली कांट्रेक्ट बस एसोसिएशन के महासचिव हरीश सभ्भरवाल ने बताया कि झुलझुली फिटनेस सेंटर में कुछ समय पहले से ऐसे मामले आ रहे हैं कि ट्रकों की बीमा पॉलिसी फर्जी पाई गई हैं। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से भी शिकायत की है। 
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बस और ट्रक मालिकों से अपील की है कि सस्ती बीमा पॉलिसी के चक्कर में ना पड़ें और अधिकृत बीमा कंपनियों से ही बीमा पॉलिसी खरीदें। उन्होंने बताया कि बसों और ट्रकों की बीमा पॉलिसी पर करीब 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है। इसलिए वाहन मालिक सस्ती बीमा पॉलिसी के चक्कर में धोखे का शिकार हो रहे हैं।  

उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों को बीमा पॉलिसी लेते समय ध्यान रखना चाहिए कि उसपर क्यूआर कोड है या नहीं। यदि बीमा पॉलिसी पर क्यूआर कोड नहीं है तो वह फर्जी है।


उनके अनुसार इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आइआरडीए) ने बीमा कंपनियों के लिए वाहन बीमा पॉलिसी पर एक क्यूआर कोड मुद्रित करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे असली बीमा पॉलिसी की पहचान आसानी से की जा सकती है।

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