प्लाज्मा थेरेपी के शुरुआती नतीजे काफी उत्साहवर्द्धक, एलएनजेपी में चल रहा ट्रायल, जानें कैसे काम करती है थैरेपी
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कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई में दिल्ली से राहत भरी खबर आई है। एलएनजेपी अस्पताल में गंभीर तौर पर संक्रमित चार मरीजों की प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल के शुरुआती नतीजे काफी उत्साहवर्द्धक रहे हैं। दो मरीज थेरेपी देने के चार दिन के भीतर आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए हैं। जल्द ही इनको अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। वहीं, बाकी दो मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार केंद्र से दूसरे अस्पतालों में भी प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने की इजाजत मांगने जा रही है। दस दिन पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को प्लाज्मा थेरेपी के सीमित ट्रायल की अनुमति दी थी। सरकारी अस्पताल एलएनजेपी में गंभीर मरीजों पर इसका ट्रायल चल रहा है। अगले दो-तीन दिन में और ट्रायल करेंगे। इसके बाद केंद्र सरकार से पूरी दिल्ली के अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी कराने की अनुमति मांगी जाएगी। उम्मीद है कि अनुमति मिल जाएगी।
केजरीवाल ने माना कि हालांकि अभी नतीजे बहुत शुरुआती हैं। फिर भी यह काफी उत्साहवर्द्धक हैं। इससे उम्मीद की किरण नजर आ रही है। इसके सहारे आगे इलाज करना संभव होगा। केजरीवाल ने अपील की कि जो लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं, अब उनको आगे आना चाहिए, जिससे प्लाज्मा की कमी न होने पाए।
इस तरह काम करती है थेरेपी
अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, कोरोना संक्रमित जो मरीज ठीक हो जाते हैं, ऐसे मरीजों के खून में एंटीबॉडी बनती है। यह उनको कोरोना से बचाती है। अब अगर ठीक हुए मरीज के खून से प्लाज्मा निकाला जाए और जो बीमार मरीज हैं, उसमें डाल दिया जाए, तो बीमार मरीज भी ठीक हो जाता है।
थेरेपी पुरानी, लेकिन वायरस से लड़ने के लिए बेहतर
दिल्ली सरकार की प्लाज्मा थेरेपी करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. सरीन ने बताया कि इस थेरेपी का 1901 में डिप्थीरिया के रोगियों पर इस्तेमाल हुआ था। बाद में सांस के रोगियों का भी इससे इलाज हो रहा है। कोरोना वायरस के इलाज के संबंध में हमें लगा कि चूंकि कोरोना वायरस की कोई दवाई नहीं है और यह दवा भी नहीं है कि इससे संक्रमण फैलने से रोका जा सके, तो यही एक थेरेपी थी, जिससे इस वायरस को न्यूट्रलाइज किया जा सकता है।
डॉ. सरीन के मुताबिक, बीमारी के तीन फेज हैं। पहले फेज में वायरस शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। इसमें कई बार लक्षण जाहिर नहीं होते। दूसरे और पल्मोनरी फेज में फेफड़े के अंदर घाव होने लगता है। इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है। इसी फेज के मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी कारगर है। अब अगर दूसरे फेज के मरीज को प्लाज्मा दें तो वायरस भी कम हो सकता है और दूसरे अंगों को खराब होने से बचाया जा सकता है। तीसरे फेज में तो मरीज के अंग खराब होने लगते हैं। इसमें मरीज के बचने की संभावना कम हो जाती है।
प्लाज्मा देने से नहीं होगा कोई नुकसान
डॉ. सरीन ने माना कि अभी दिक्कत डोनर की आ रही है। अलग-अलग वजहों से ठीक होकर वापस लौटे मरीज प्लाज्मा देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इससे डोनर को कोई खतरा नहीं है। यह ब्लड डोनेशन नहीं है। प्लाज्मा में एक मशीन होती है, खून उसमें से जाता है। प्लाज्मा उसमें से निकाल लिया जाता है और बाकी खून शरीर में वापस डाल दिया जाता है। इससे कोई कमजोरी नहीं आती। कोई चाहे तो एक सप्ताह में फिर दे सकते हैं।
दिल्ली सरकार ठीक हुए लोगों को करेगी फोन
मुख्यमंत्री ने बताया कि जितने लोग ठीक होकर गए हैं, उनके पास दिल्ली सरकार फोन करेगी। डोनर के राजी होने के बाद सरकार उनके आने-जाने व प्लाज्मा लेने तक का इंतजाम करेगी। डोनर को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। न ही प्लाज्मा देने से किसी को कोई नुकसान होगा।
ऐसे हो रहा मरीजों में सुधार
एलएनजेपी अस्पताल में चार मरीजों पर थेरेपी का ट्रायल चल रहा है। पहले दो मरीजों को मंगलवार को प्लाज्मा दिया गया था। इसमें से एक मरीज की सांस लेने की दर पल्मोनरी रेट 30 थी, जबकि यह 15 होनी चाहिए। वहीं, आक्सीजन सेचुरेशन लेवल 85 फीसदी था। यह 95 फीसदी होना चाहिए। प्लाज्मा देने के बाद सांस लेने की दर 20 और आक्सीजन सेचुरेशन लेवल 98 फीसदी हो गया है। दूसरे की हालत में भी इसी तरह सुधार आया है।
दोनों को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। अगले एक-दो दिन में इनको छुट्टी भी दे दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि बाकी दो मरीजों को बृहस्पतिवार को प्लाज्मा दिया गया। 24 घंटे में इनकी सेहत में काफी सुधार आया है। वहीं, एक निजी अस्पताल से एक मरीज इस थेरेपी से ठीक भी हो गया है। जल्द ही दो-तीन लोगों को प्लाज्मा दिया जाएगा।