दिल्लीः संक्रमण दर में गिरावट, मगर ओपीडी में बढ़ने लगे मरीज
राजधानी में संक्रमण से हालात सुधरने लगे हैं इससे लोगों के मन में बीमारी को लेकर डर भी कम होने लगा है। अब अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जुलाई के मुकाबले यह दोगुनी हो गई है। इसके अलावा अब विटामिन की दवाओं और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री में भी कमी आई है।
जून और जुलाई के महीने में राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ रहे थे। उस समय लोगों में बीमारी का काफी डर था। उस दौरान संक्रमण के डर से अन्य बीमारियों के मरीज अस्पताल जाने से बच रहे थे। वहीं,दवाओं की दुकानों पर रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों और विटामिन की दवाओं की बिक्री तीन गुना तक बढ़ गई थी। जो अब सामान्य होने लगी है। ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जून महीने में एम्स और सर गंगाराम अस्पताल में ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू की गई थी,लेकिन इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या काफी कम थी।
एम्स अस्पताल में प्रशासनिक विभाग के उपनिदेशक सुभाशीष पांडा ने बताया कि 25 जून को अस्पताल में ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू की गई थी। उस समय एक विभाग में डॉक्टरों को 15 मरीजों को देखना था,लेकिन अस्पताल में वहीं मरीज आ रहे थे। जिनकी हालत गंभीर थी। जुलाई तक करीब यही स्थिती रही,लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब प्रत्येक विभाग में 30 मरीजों को देखा जा रहा है। जुलाई में एक विभागों में औसतन 8 से 10 मरीज आ रहे थे। वहीं,अब 20 से 25 मरीज आ रहे हैं।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अजय सहगल ने बताया कि जुलाई में रोजाना 350 से 450 मरीज अस्पताल में आ रहे थे। यह संख्या अब करीब 40 फीसदी बढ़ गई है। अब रोजाना औसतन 700 से 800 मरीज आ रहे हैं। हालांकि जनवरी के मुकाबले यह संख्या कम है। उम्मीद है आने वाले दिनों में हालात और बेहतर होंगे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में नॉन कोविड मरीजों के लिए विशेष इंतजाम हैं। उनका इलाज के लिए अलग से पूरी व्यवस्था है। अस्पताल में सभी सुरक्षा मानकों का पूरी सख्ती से पालन किया जा रहा है।
कई अस्पतालों में ओपीडी खुलने का इंतजार
- हिन्दूराव अस्पताल में ओपीडी सेवा बन्द है।
- सफदरजंग में ओपीडी में साढ़े 11 बजे की बजाय साढ़े 10 बजे तक ही पंजीकरण हो रहा है।
- कोरोना की वजह से लोकनायक में ओपीडी सेवा बंद है।
- जीटीबी अस्पताल में कोरोना के कारण ओपीडी बंद है।
यहां फोन पर परामर्श की सुविधा
एम्स में फोन और ईमेल के जरिये भी लोग डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। एक दिन में औसतन 500 से 700 लोगों को ईमेल या फोन के जरिए परामर्श दिया जा रहा है।
-लेडी हॉर्डिंग में भी व्हाट्सएप और कॉल के जरिए परामर्श की सुविधा है। हर रोज 100 लोगों को परामर्श दिया जा रहा है।
हालात सुधरने से विटामिन की दवाओं की बिक्री में आई कमी
ऑल इंडिया केमिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने बताया कि जून और जुलाई महीने में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ान वाले खाद्य पदार्थ और विटामिन की दवाओं की बिक्री पहले के मुकाबले करीब दो गुना बढ़ गई थी। लोग अधिक मात्रा में इनका सेवन कर रहे थे,लेकिन बीते 20 दिनों से इसमें कमी आ रही है। अब इन पदार्थों की मांग सामान्य तौर पर ही हो रही है।
जीटीबी अस्पताल के पास मेडिकल स्टोर संचालक विनय सहदेव बताते हैं कि जब दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ रहे थे। उस दौरान विटामिन की दवाओं की बिर्की में काफी उछाल आ गया था। करीब दो महीने तक इन दवाओं की काफी बिक्री हुई,लेकिन अब पहले जैसी सेल नहीं है।
बिना डॉक्टर की सलाह के न लें विटामिन
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार बताते हैं कि लोगों को विटामिन लेनी चाहिए,लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप अपने मन से ही विटामिन की दवां लेने लगे। इसके कई दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। विटामिन की कुछ खास खुराक होती है, जो डॉक्टर आपको बताएंगे। डॉक्टर ही आपको बता सकते हैं कि आप को इलाज के दौरान कितना बिटामिन की मात्रा लेनी है और संक्रमण से बचने के लिए कितनी खुराक लेनी चाहिए होती है।