{"_id":"582474714f1c1b067fb3a31d","slug":"industries-are-effecting-by-ban-on-note","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विदेशी पर्यटकों तक का जीना हुआ मुहाल, नोटों पर बैन के चलते भटकने को मजबूर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी पर्यटकों तक का जीना हुआ मुहाल, नोटों पर बैन के चलते भटकने को मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Fri, 11 Nov 2016 12:24 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट पर पाबंदी का असर शहर के उद्योगों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। यहां रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं छोटी-मोटी माल ढुलाई के काम में भी दिक्कत है। इस प्रकार की मार ढुलाई करने वाले वाहन चालक हजार और 500 के नोट नहीं ले रहे हैं।
उद्यमियों का कहना है कि उनके पास 100-100 के इतने नोट नहीं हैं कि वह उन्हें दे सकें। वहीं औद्योगिक यूनिटों में काम करने वाले श्रमिकों को वेतन देने का भी संकट हो गया है। वह पुराने नोट नहीं ले रहे हैं।
इस परेशानी के बाद भी उद्यमियों ने प्रधानमंत्री के पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि काले धन पर अंकुश लगाने का इससे बेहतर कोई और उपाय नहीं हो सकता है। उद्यमी एसके आहूजा का कहना है कि माल ढुलाई के काम में थोड़ी परेशानी आ रही है। सबसे अधिक परेशान उद्योगों में काम करने वाले छोटे कर्मचारी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उद्यमियों का कहना है कि उनके पास 100-100 के इतने नोट नहीं हैं कि वह उन्हें दे सकें। वहीं औद्योगिक यूनिटों में काम करने वाले श्रमिकों को वेतन देने का भी संकट हो गया है। वह पुराने नोट नहीं ले रहे हैं।
विज्ञापन
इस परेशानी के बाद भी उद्यमियों ने प्रधानमंत्री के पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि काले धन पर अंकुश लगाने का इससे बेहतर कोई और उपाय नहीं हो सकता है। उद्यमी एसके आहूजा का कहना है कि माल ढुलाई के काम में थोड़ी परेशानी आ रही है। सबसे अधिक परेशान उद्योगों में काम करने वाले छोटे कर्मचारी हैं।
विज्ञापन
विदेशी पर्यटक भी रहे परेशान...
वह रोजाना कमाते और खाते हैं। उनके पास 500 व एक हजार रुपये के नोट होने के बावजूद दुकानदार राशन नहीं दे रहा है और ना ही वह ऑटो से आने-जाने में सक्षम हैं। क्योंकि आटो वाले खुल्ला पैसा मांगता है।
आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी का कहना है प्रधानमंत्री का यह कदम सराहनीय है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। मगर औद्योगिक यूनिटों को काफी दिक्कत हो रही है। कर्मचारियों को वेतन देने में काफी परेशानी आ रही है। उद्योगों में आठ व नौ को सैलरी डे होता है मगर कोई पुराना नोट लेने को तैयार नहीं है।
गुरुग्राम में पर्यटक के तौर पर आए विदेशी सैलानी नोट के चक्कर में परेशान हैं। शुक्रवार को बोतलबंद ब्रांडेड पानी लेने के लिए भी उन्हें काफी परेशान होना पड़ा है। सेक्टर-14 मार्केट के पास एक विदेशी ने पानी का बोतल खरीदी और 500 रुपये का नोट दिया। जिस पर दुकानदार ने मना कर दिया।
आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी का कहना है प्रधानमंत्री का यह कदम सराहनीय है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। मगर औद्योगिक यूनिटों को काफी दिक्कत हो रही है। कर्मचारियों को वेतन देने में काफी परेशानी आ रही है। उद्योगों में आठ व नौ को सैलरी डे होता है मगर कोई पुराना नोट लेने को तैयार नहीं है।
गुरुग्राम में पर्यटक के तौर पर आए विदेशी सैलानी नोट के चक्कर में परेशान हैं। शुक्रवार को बोतलबंद ब्रांडेड पानी लेने के लिए भी उन्हें काफी परेशान होना पड़ा है। सेक्टर-14 मार्केट के पास एक विदेशी ने पानी का बोतल खरीदी और 500 रुपये का नोट दिया। जिस पर दुकानदार ने मना कर दिया।